पटना , जून 27 -- ाज्य सरकार थारू जनजातीय समुदाय के सामाजिक आर्थिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले 16 वर्षों में सरकार ने इस दिशा में 180 करोड़ रुपये की राशि खर्च की है, जिससे थारू बस्तियों की सूरत और सीरत दोनों बदली गई हैं। समेकित थरूहट विकास अभिकरण की स्थापना वर्ष 2010 में पश्चिम चंपारण जिले के मुख्यालय बेतिया में की गई। अभिकरण के माध्यम से थारू बहुल क्षेत्रों में समग्र विकास की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। अब तक 357 योजनाएं प्रस्तावित की गईं, जिनमें से 286 योजनाएं पूर्ण कर ली गई हैं। इनमें विद्यालयों में छात्रावासों का निर्माण, उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, स्टेडियम का विकास, पीसीसी संपर्क पथ (सड़कों) का निर्माण, कौशल विकास कार्यक्रम शामिल है, बाकी बचे योजनओं को जल्द पूरा करने का लक्ष्य है। इन योजनाओं से थारू युवाओं को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, खेल के अवसर और रोजगार की दिशा में प्रशिक्षण मिल रहा है। पश्चिम चंपारण जिले की 43 पंचायतों में लगभग दो लाख 20 हजार थारू जनसंख्या निवास करती है। इनमें बगहा, नरकटियागंज समेत कई अन्य इलाके शामिल हैं। थारू समुदाय मुख्य रूप से कृषि, वनोपज और पारंपरिक व्यवसायों पर निर्भर रहा है। सरकार की इन योजनाओं ने उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने और उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार प्रतिवर्ष थारू समाज के उत्थान के लिए अलग से बजट का प्रावधान करती है। वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए बजट की घोषणा जल्द ही होने वाली है।
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