पटना , अक्टूबर 06 -- डीजी (विधि-व्यवस्था सह कमजोर वर्ग) श्रीमती के सुहिता अनुपम ने मंगलवार को कहा कि पुलिस थानों में आने वाले किसी पीड़िता खासकर महिला, बच्चों एवं ट्रांसजेंडर से बेहद संजीदा के साथ सभी स्तर के पुलिसकर्मी अच्छा व्यवहार करें। पुलिस में लैंगिक संवेदनशीलता जैसे बेहद महत्वपूर्ण विषय को लेकर प्रभावी पुलिसिंग और जेंडर आधारिक मुद्दों के प्रति उत्तरदायी दृष्टिकोण अपनाने को लेकर एक दिवसीय क्षमतावर्द्धन कार्यशाला का आयोजन पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन के सभागार में किया गया।
सीआईडी की कमजोर वर्ग इकाई की तरफ से 'जेंडर रिस्पांसिव पुलिसिंग' विषय पर आयोजित कार्यशाला में सभी जिलों की महिला थानों की थानाध्यक्ष और प्रत्येक जिले से एक-एक महिला पदाधिकारी ने भाग लिया।
कार्यक्रम की बतौर मुख्य अतिथि एडीजी श्रीमती अनुपम ने महिला पुलिस पदाधिकारियों से खासतौर से कहा कि अपने काम में सख्त होना अच्छी बात है, लेकिन पीड़ितों के प्रति सख्त रवैया नहीं अपनाना चाहिए। महिलाओं और बच्चों के प्रति पुलिस का रवैया बेहद संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने महिला पुलिस पदाधिकारियों को खासतौर से नसीहत दी कि जिस तरह से वे अपने घरों को संभालती हैं, उसकी तरह के थाना और इससे तमाम कार्यों को भी संभालें। महिला और बच्चों के प्रति हिंसा से जुड़ी किसी वारदात को गंभीरता से समझते हुए इसे अधिक तवज्जों दें एवं इन मामलों पर तत्परता से कार्य करें। संवेदनशील बने और आसपात हिंसा से जुड़ी किसी घटना को संवेदनशीलता से निपटाने की हमेशा चेष्टा करें। हिंसा से जुड़े कानूनी और सामाजिक पहलूओं पर विचार-विमर्श करते हुए इन मामलों का निपटारा जल्द कराएं।
एडीजी ने कहा कि कार्य क्षेत्र के तनाव और रोजाना की दिनचर्या के बीच संतुलन बनाने की बेहद जरूरत है। जिस तरह घर को व्यवस्थित करने में हम रोजाना योगदान देते हैं, उसी तरह थाना के सभी कार्यों का निपटारा भी पूरी शिद्दत से करें। एडीजी ने सभी पुलिसकर्मियों से अपने रोजाना के कार्यों का मूल्यांकन करने के लिए कहा, जिससे पता चल सके कि क्या अच्छा किया और अगले दिन क्या करने की आवश्यकता है।
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