पटना , अक्टूबर 17 -- बिहार में थर्मोकोल कचरे का पुनर्चक्रण कर उसे उपयोगी उत्पाद में बदलने की पहल से रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान और केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का एक मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ और कचरा-मुक्त बनाना है।
ग्रामीण विकास विभाग तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार द्वारा इन अभियानों में स्वच्छता के साथ-साथ ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रामीण समुदाय की भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण पर के लिए आवश्यक निर्देश दिये जाते रहे हैं। इसके अनेक सकारात्मक एवं उत्साहवर्धक परिणाम अब सामने आ रहे हैं।
राजधानी पटना अंतर्गत खुशरूपुर प्रखंड के अलावलपुर पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (एलएसबीए) की पहल से अपशिष्ट प्रबंधन की एक नई नजीर पेश की गई है। यहां पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा माने जाने वाले थर्मोकोल कचरे का न सिर्फ वैज्ञानिक निस्तारण हो रहा है, बल्कि इससे उपयोगी दाना बनाकर बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ भी कमाया जा रहा है।
कभी अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाइयों (डब्ल्यूपीयू) के लिए सिरदर्द बना थर्मोकोल कचरा आज पटना जिले के अलावलपुर पंचायत में एक सफल उद्योग मॉडल में बदल चुका है और इसका दायरा बिहार से निकलकर झारखंड और उत्तर प्रदेश तक फैल चुका है।
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