अगरतला , दिसंबर 16 -- त्रिपुरा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस समय गठबंधन की मुश्किलों का सामना कर रही है, क्योंकि सरकार में दो कनिष्ठ सहयोगियों ने आदिवासी कल्याण मंत्री बिकाश देबबर्मा के खिलाफ अपनी चिंताएं जताई हैं। विपक्षी पार्टियों माकपा और कांग्रेस ने एक सार्वजनिक सभा में आदिवासियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए उन्हें कैबिनेट से हटाने की मांग की है।

भाजपा के गठबंधन सहयोगी इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) ने मंगलवार को पिछले हफ्ते की गई अपमानजनक टिप्पणी के लिए आदिवासी कल्याण मंत्री के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की धमकी दी। एक दिन पहले एक और गठबंधन सहयोगी, टिपरा मोथा ने श्री बिकाश के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया दी थी, जिसके बाद विपक्षी कांग्रेस और माकपा ने उन्हें कैबिनेट से हटाने की मांग की। इस बीच टिपरा मोथा के समर्थकों ने सोमवार को खोवाई जिले में श्री बिकाश के गृह निर्वाचन क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया और मंत्री के इस्तीफे की मांग की।

गाैरतलब है कि श्री बिकाश ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा और दो अन्य वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी में टिपरा मोथा पर हमला बोला था। उन्होंने कहा, "टिपरा मोथा को मुर्गे की तरह फाड़ देना चाहिए," जिससे तुरंत राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई।

आईपीएफटी के महासचिव स्वपन देबबर्मा ने कहा कि एक मंत्री "ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकता," इस बात पर जोर देते हुए कि ऐसी टिप्पणियां राज्य के शांतिपूर्ण, राजनीतिक और लोकतांत्रिक माहौल को खतरे में डाल सकती हैं। उन्होंने इस चेतावनी को सभी राज्य मंत्रियों के लिए "पहला और आखिरी संदेश" बताया।

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