अगरतला , जून 24 -- त्रिपुरा सरकार ने पुलिस हिरासत में प्रताड़ना और प्राथमिकी दर्ज न करने के आरोपों में ईस्ट अगरतला थाने और ईस्ट अगरतला महिला थाने के प्रभारियों (ओसी) सहित आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

यह फैसला उच्च न्यायालय की तल्ख टिप्पणी और न्यायिक सख्ती के बाद आया है। मामला बनमालीपुर के एक निवासी और उसके परिवार से जुड़ा है, जिन्होंने मकान निर्माण के विवाद में रिश्वत देने से मना कर दिया था। आरोप है कि इसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और वहां उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

निलंबित किए गए पुलिस अधिकारियों में ईस्ट अगरतला थाने के प्रभारी सुब्रत देबनाथ, ईस्ट अगरतला महिला थाने की प्रभारी शकुंतला देबनाथ, उप-निरीक्षक साइकत दे, सहायक उप-निरीक्षक आनंद देबबर्मा, हवलदार सुमन आचार्य और मिथुन रुद्रपाल के साथ-साथ एसपीओ रिपुल देबनाथ और शुभंकर धर शामिल हैं।

इसके अलावा एसपीओ जॉय देबनाथ और अगरतला नगर निगम (एएमसी) की टास्क फोर्स के कर्मचारी रबींद्र नारायण घोष को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। ये दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। साथ ही, गृह विभाग के अवर सचिव समरेंद्र देबबर्मा को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने उन पर गुमराह करने वाला हलफनामा जमा करने के आरोप में विभागीय कार्रवाई करने की बात कही थी।

यह पूरा विवाद बनमालीपुर की रहने वाली सुश्री रत्ना रॉय की शिकायत से शुरू हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया था कि नगर निगम ने उनके घर का निर्माण कार्य रुकवा दिया था और निगम के ही एक टास्क फोर्स कर्मचारी ने काम शुरू कराने के बदले दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। रिश्वत न देने पर उनके घर में जबरन घुसा गया और बाद में ईस्ट अगरतला थाने की हिरासत के दौरान उनके बेटे के साथ मारपीट और यौन उत्पीड़न किया गया।

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