अगरतला , सितंबर 17 -- त्रिपुरा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव और विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के मौके के अवसर पर राज्य सरकार के महीने भर चलने वाले 'सेवा संकल्प' कार्यक्रम आयोजित करने के फ़ैसले पर संदेह व्यक्त किया है।

श्री चौधरी ने इस पहल के लिए धन के स्रोत की स्पष्ट जानकारी मांगी है। उन्होंने इस मौके पर सरकारी कार्यक्रम आयोजित करने और उनके लिए धन देने के सरकार के फ़ैसले और खर्च पर सवाल उठाए हैं। त्रिपुरा सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के जन-सेवा कार्यकाल को मनाने के लिए आज से 17 अक्टूबर तक 'सेवा संकल्प अभियान' शुरू किया है, जिसका उद्देश्य जन-सेवा, कल्याणकारी योजनाओं और दूसरे कार्यक्रमों को एक साथ लाना है।

श्री चौधरी ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि क्या राज्य के बजट में इन गतिविधियों के लिए कोई खास प्रावधान है और उन्होंने इनके लिए धन जुटाने की सरकार की योजना के बारे में पूछा है। उन्होंने किसी राजनीतिक पार्टी द्वारा अपने नेता का जश्न मनाने और सरकार द्वारा उसी अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करने के बीच के अंतर पर बल दिया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी को अपने पार्टी मंच से श्री मोदी के जन्मदिन के कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार है।

हालांकि, श्री चौधरी ने श्री मोदी के मौजूदा प्रधानमंत्री और एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती होने के कारण ऐसी गतिविधियों के लिए सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं और उन्होंने इस कार्यक्रम में सरकारी अधिकारियों की भागीदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं।

श्री चौधरी के अनुसार, किसी राजनीतिक नेता से जुड़ी गतिविधियों के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करने से सरकारी संस्थाओं के राजनीतिकरण का खतरा उत्पन्न होता है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी पार्टी के केंद्रीय नेता की राजनीतिक छवि को बढ़ावा देने के लिए जनता के पैसे का इस्तेमाल किया जा सकता है।

उन्होंने आंगनवाड़ी और योजना कर्मियों के वेतन में कथित देरी की ओर ध्यान दिलाया, त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त ज़िला परिषद के कर्मचारियों और अन्य लोगों के लिए पेंशन भुगतान को लेकर चिंता व्यक्त की और बताया कि पुलिसकर्मी राशन के पैसे का इंतज़ार कर रहे हैं जबकि विशेष पुलिस अधिकारियों को पूजा का एडवांस नहीं मिला है।

श्री चौधरी ने सड़क की मरम्मत, खाली पदों और बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के मौकों से जुड़े मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने प्रधानमंत्री के जन्मदिन के जश्न पर सरकार के खर्च पर सवाल उठाए और सरकार के इस फैसले को गैर-कानूनी, अनैतिक और अनियमित बताते हुए इस खर्च को रोकने की मांग की।

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