अगरतला , अक्टूबर 16 -- त्रिपुरा में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार को उस वक्त भारी फजीहत झेलनी पड़ी, जब गठबंधन की सहयोगी पार्टी 'टिप्रा मोथा' के नेता और वन मंत्री अनिमेष देबबर्मा को गुरुवार को खोवाई जिले के आशारामबाड़ी स्थित बच्चाइबारी में महिलाओं के कड़े विरोध और 'गो बैक' के नारों का सामना करना पड़ा।
इस घटना से सत्तारुढ़ भाजपा-टिप्रा मोथा गठबंधन के भीतर चल रही अंदरूनी कलह खुलकर सामने आयी है।
रिपोर्टों के मुताबिक महिलाओं ने काले झंडे लहराए और त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) के तहत हाल ही में हुए ग्राम समिति चुनावों में 'मोथा' उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने में श्री देबबर्मा की विफलता का विरोध किया। इस विरोध-प्रदर्शन की वजह से मंत्री खोवाई नहीं पहुंच सके, जहां मुख्यमंत्री माणिक साहा के कार्यक्रम में शामिल होना था, तब श्री देबबर्मा इस कार्यक्रम में ऑनलाइन शामिल हुए।
इस प्रदर्शन के बाद भाजपा के साथ सत्ता में साझीदार 'टिप्रा मोथा' के एक धड़े के साथ मंत्री के रिश्तों को लेकर नयी बहस छिड़ गयी है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पार्टी के चुनाव प्रचार से उनकी गैरमौजूदगी ने समर्थकों को नाराज कर दिया है।
कुछ लोगों का मानना है कि चुनाव प्रचार में उनकी सीमित भागीदारी इस बात का संकेत थी कि उन्होंने एक महत्वपूर्ण चुनाव के दौरान खुद को टिप्रा मोथा से दूर कर लिया था।
श्री देबबर्मा के पार्टी नेतृत्व के कुछ सदस्यों से मतभेद रहे हैं और उन्होंने हमेशा टिप्रा मोथा के संस्थापक प्रद्योत किशोर देबबर्मा के फैसलों का समर्थन नहीं किया है। माना जा रहा है कि इन विवादों ने मंत्री और पार्टी संगठन के बीच की दूरी और बढ़ा दी है।
एक अन्य विवाद मोथा विधायक रंजीत देबबर्मा से जुड़ा है। अनिमेष देबबर्मा ने एक सार्वजनिक सभा में दिए गए बयान को लेकर उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। कहा जाता है कि रंजीत देबबर्मा ने बिना नाम लिए एक मंत्री को "टकला मंत्री" कहा था। यह टिप्पणी एक ही पार्टी के इन दोनों नेताओं के बीच तनाव का एक और कारण बन गयी थी।
काले झंडों के साथ हुए इस प्रदर्शन ने इन अटकलों को हवा दे दी है कि ग्राम समिति चुनावों में श्री देबबर्मा की भूमिका को लेकर उपजा गुस्सा मोथा के भीतर की व्यापक फूट से जुड़ा हो सकता है। प्रदर्शनकारियों के पार्टी से संबंध और क्या किसी गुट ने आधिकारिक तौर पर इस प्रदर्शन का समर्थन किया था, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पायी है। यह विरोध प्रदर्शन एडीसी ग्राम समिति चुनावों के तुरंत बाद हुआ है, जिसमें टिप्रामोथा ने भारी जीत दर्ज की थी। इस परिणाम ने आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति मजबूत की है और गठबंधन के नेताओं के बीच एकता एवं तालमेल के महत्व को और बढ़ा दिया है।
इस घटना ने चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी और पार्टी अनुशासन को लेकर मतभेदों समेत मोथा नेतृत्व के साथ श्री देबबर्मा के संबंधों पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं। इस विरोध प्रदर्शन पर न तो मंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है और न ही मोथा नेताओं की तरफ से कोई बयान आया है।
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