अगरतला , अगस्त 20 -- त्रिपुरा मानवाधिकार आयोग( टीएचआरसी) ने सिपाहीजाला जिले के बिशालगढ़ पुलिस स्टेशन में एक व्यक्ति को गैर-कानूनी हिरासत में रखने, परेशान करने और अनुचित व्यवहार करने के मामले की राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को जांच करने का आदेश दिया है।

आयोग ने गोमती जिले के उदयपुर के रहने वाले साधन पॉल की शिकायत के बाद यह जांच शुरू की। पॉल ने बिशालगढ़ पुलिस स्टेशन के इंचार्ज और अन्य पुलिकर्मियों पर उन्हें परेशान करने का आरोप लगाया था। शिकायत के अनुसार, बिशालगढ़ पुलिस ने चार अगस्त को साधन पॉल के बेटे सुशांत पॉल को बिना गिरफ्तारी का कारण बताए हिरासत में ले लिया था। आरोप है कि उसे 24 घंटे से ज़्यादा समय तक हिरासत में रखा गया और फिर छह अगस्त को कोर्ट में पेश किया गया।

आयोग ने माना कि अगर आरोप सच साबित होते हैं, तो हिरासत में रखने की घटना संविधान के अनुच्छेद 21 और 22(2) के तहत सुरक्षित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकती है। शिकायत में पुलिस पर आरोप लगाया गया कि जब साधन पॉल पुलिस स्टेशन गए, तो उन्हें अपमानित किया गया और मानसिक रूप से परेशान किया गया।

यह भी दावा किया गया कि उन पर एक घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर करने का दबाव डाला गया, जिसमें वे चार लाख रुपये का कर्ज चुकाने के लिए सहमत हों, जिसके लिए वे जिम्मेदार नहीं थे। यह मामला एक वित्तीय विवाद से जुड़ा था। टीएचआरसी ने इस बात पर जोर दिया कि वित्तीय विवादों का समाधान आमतौर पर दीवानी कानूनी तरीकों से किया जाता है और पुलिस किसी व्यक्ति को किसी दूसरे व्यक्ति की कथित वित्तीय देनदारी लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकती है।

शिकायतकर्ता ने बिशालगढ़ पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और उसकी जांच करने के साथ-साथ घटना से जुड़ी जनरल डायरी, गिरफ्तारी मेमो, फॉरवर्डिंग रिपोर्ट और केस डायरी की जांच का भी अनुरोध किया है।

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