अगरतला , जुलाई 23 -- त्रिपुरा मानवाधिकार आयोग (टीएचआरसी) ने एक पायलट की मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत पर एयर इंडिया एक्सप्रेस और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को नोटिस जारी किया है।

टीएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरिंदम लोध के नेतृत्व वाली पीठ ने पायलट कैप्टन पार्थ भौमिक की शिकायत पर एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) और केन्द्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अगरतला निवासी कैप्टन भौमिक का आरोप है कि उनसे जबरन ट्रेनिंग बॉन्ड पर हस्ताक्षर कराए गए। उनसे पदोन्नति और कोलकाता में तैनाती का वादा किया गया, लेकिन इनमें से कुछ भी पूरा नहीं हुआ। उनका दावा है कि उन्हें अक्टूबर 2023 से इस साल जून तक यानी लगभग 13 महीनों तक बिना वेतन के रखा गया। इसके बाद एयरलाइन ने बिना किसी उचित नोटिस के 22 जून को उन्हें नौकरी से निकाल दिया।

श्री भौमिक का यह भी कहना है कि एयरलाइन ने उनका अनापत्ति प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज अपने पास रोक रखे हैं, जिससे उन्हें नई नौकरी खोजने में भारी दिक्कत आ रही है। पायलट ने तर्क दिया कि अगस्त 2024 में जारी की गई एक नई वरिष्ठता सूची ने उनके करियर और पदोन्नति की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया।

वेतन न मिलने और सेवा से हटाए जाने के कारण वह गंभीर वित्तीय संकट में फंस गए। उन्हें गहने गिरवी रखने पड़े और उनके लोन की किश्तें चूक गईं। इसके अलावा, उनका मेडिकल इंश्योरेंस भी खत्म हो गया, जिसका सीधा असर उनकी 78 वर्षीय मां पर पड़ा, जो इस साल जून में आईसीयू में भर्ती थीं।

श्री भौमिक ने इन उल्लंघनों की पूर्ण जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अपने एनओसी व कार्य संबंधी दस्तावेजों को तत्काल सौंपने का अनुरोध किया है। साथ ही, बकाया वेतन के 2.44 करोड़ रुपये और मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे के तौर पर एक करोड़ रुपये, यानी कुल 3.44 करोड़ रुपये के भुगतान की मांग की है।

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