अगरतला , जनवरी 19 -- त्रिपुरा बार एसोसिएशन की ओर से पश्चिम त्रिपुरा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का बहिष्कार करने की घोषणा के एक दिन बाद इसके अध्यक्ष एवं न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) गौतम सरकार ने कई वकीलों और अपने दफ्तर के कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है, जिसमें उन पर जबरन कार्यालय में घुसने और धमकाने का आरोप लगाया गया है।
त्रिपुरा बार एसोसिएशन के सचिव कौशिक इंदु ने संवाददाताओं से कहा कि बहिष्कार का फैसला गौतम सरकार के खिलाफ गंभीर आरोपों के कारण लिया गया है, जो कथित तौर पर नशे की हालत में सुनवाई में शामिल हो रहे थे और खुले अदालत में अपने कर्मचारियों और वकीलों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे।
उपभोक्ता न्यायालय के अध्यक्ष के खिलाफ गंभीर आरोपों ( जिसमें घोर कदाचार और ऑफिस के समय शराब पीना शामिल है) को देखते हुए त्रिपुरा बार एसोसिएशन ने आगे की कार्रवाई तय करने के लिए सोमवार को एक आम सभा की बैठक बुलाई है। विरोध के रूप में, बार एसोसिएशन ने उन्हें पद से हटाने की मांग करते हुए उनकी अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला किया है।
इस बीच श्री सरकार ने न्यू कैपिटल कॉम्प्लेक्स थाने में एक प्राथमिकी दर्ज कराई है, जिसमें लगभग 30 वकीलों, दफ्तर के कर्मचारियों और अन्य लोगों पर उनके आधिकारिक चैंबर में जबरन घुसने और उन्हें धमकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि इस समूह ने उनका बैग छीनने की कोशिश की, जिसमें महत्वपूर्ण केस फाइलें थीं और उनके चैंबर में एक शत्रुतापूर्ण माहौल बनाया। उन्होंने कहा कि इस घटना के कारण उन्हें गंभीर शारीरिक परेशानी हुई, जिसमें घबराहट और बेचैनी शामिल है, जिसके कारण उन्हें अपनी 61 साल से अधिक उम्र और पहले से मौजूद दिल की बीमारी के कारण तुरंत मेडिकल सहायता लेनी पड़ी।
श्री सरकार ने कहा कि यह कार्य एक वैधानिक अर्ध-न्यायिक निकाय के कामकाज में जानबूझकर बाधा डालना था और यह डराने वाला और प्रेरित था। इसके विपरीत, उपभोक्ता न्यायालय के वकीलों और स्टाफ ने अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि सरकार अक्सर शराब के नशे में सुनवाई करते थे और वकीलों और कोर्ट के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करते थे।
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