अगरतला , मई 22 -- त्रिपुरा ने शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में अपनी स्थिति सुधारते हुए इसे न्यूनतम स्तर पर पहुंचा दिया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
भारत के महापंजीयक की ओर से मई 2026 में जारी नवीनतम सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) बुलेटिन के अनुसार, साल 2024 में त्रिपुरा की शिशु मृत्यु दर घटकर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 12 मौतों पर आ गई है, जो कि 24 के राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है।
त्रिपुरा की शिशु मृत्यु दर पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों असम (29), मेघालय (31) और अरुणाचल प्रदेश (17) से काफी बेहतर है। अधिकारियों ने रेखांकित किया कि यह राज्य के लिए अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है, जिसने 2023 में दर्ज 15 के आंकड़े को भी पीछे छोड़ दिया है।
रिपोर्ट अन्य जनसांख्यिकीय संकेतकों में भी सुधार को दर्शाती है, जैसे कि प्रति 1,000 जनसंख्या पर 15 की जन्म दर, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। प्रति 1,000 पर 5.9 की मृत्यु दर, जो राष्ट्रीय आंकड़े से भी नीचे है। इसके परिणामस्वरूप जनसंख्या की प्राकृतिक विकास दर 9.1 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 11.9 है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव किरण गिट्टे ने इस प्रगति का श्रेय स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार को दिया, जिसमें प्रसव पूर्व और प्रसव बाद की देखभाल को मजबूत करना, टीकाकरण के दायरे का विस्तार, बेहतर पोषण सहायता और राज्य भर में संस्थागत प्रसव में वृद्धि शामिल है।
सुश्री गिट्टे ने आवश्यक सेवाओं को समुदायों के करीब लाने और इस तरह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के परिणामों में सुधार करने के लिए स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों, डॉक्टरों और फ्रंटलाइन स्टाफ के समन्वित प्रयासों की सराहना की।
हालांकि, विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि इन लाभों को बनाए रखने और आगे सुधार करने के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच, बाल पोषण और प्रारंभिक शिशु देखभाल के हस्तक्षेपों पर निरंतर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक होगा।
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