अगरतला , जुलाई 03 -- त्रिपुरा में आम उत्पादकों की आजीविका को बेहतर बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने आम के निर्यात की संभावनाओं के मद्देनजर धलाई ज़िले में आम की खेती को 180 हेक्टेयर और ज्यादा बढ़ाने का निर्णय लिया है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने गुरुवार शाम नारिकेलकुंजा में मानसून आम उत्सव का उद्घाटन करने के बाद कहा कि पिछले कुछ सालों में दूसरे राज्यों से आम का आयात बहुत कम हुआ है और त्रिपुरा आम की खेती में आत्मनिर्भर बन गया है।
श्री नाथ ने कहा, "त्रिपुरा में आम की किस्में वास्तव में बहुत शानदार हैं। यहां न केवल भारतीय किस्में बल्कि अमेरिकी, यूरोपीय और एशियाई किस्मों के आमों की भी अब बड़े पैमाने पर खेती हो रही है। राज्य सरकार आम उत्सव को वैश्विक स्तर पर और बढ़ावा देने की योजना बना रही है।"मंत्री ने कहा कि आम उत्पादकों की और ज्यादा सहायता करने के लिए सरकार पुराने बागों का कायाकल्प करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। आम उत्पादकों के लिए ड्रिप सिंचाई की सुविधा शुरू की गई और किसानों को फ़ायदा पहुंचाने व उनकी आय दोगुनी करने के लिए कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का निर्माण करने की योजनाएं भी बनाई गईं।
उन्होंने किसानों को आम, अनानास, अदरक, छोटी मिर्च और केले की खेती पर ध्यान देने और ज़मीन को खाली न छोड़ने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे यहां आम की कई तरह की किस्में हैं; यहां की मिट्टी और मौसम की स्थिति इतनी अनुकूल है कि इसकी खेती को आसानी से कई गुना बढ़ाया जा सकता है।"श्री नाथ ने कहा कि जैसे ही 2018 में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई, खेती एवं बागवानी प्रशासन के मुख्य ध्यान का केंद्र बन गए और किसानों को बड़े पैमाने पर परियोजनाएं और उसके बाद समर्थन दिया गया, जिससे अब त्रिपुरा को वैश्विक मानचित्र पर जगह मिली है।
मंत्री ने बताया कि त्रिपुरा में लगभग 58,000 हेक्टेयर जमीन फल उत्पादन के लिए समर्पित है, जिसमें 10,000 हेक्टेयर आम के लिए हैं। त्रिपुरा में हर हेक्टेयर से लगभग पांच मीट्रिक टन आम मिलता है और उत्पादकता को कम से कम दोगुना करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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