अगरतला , मई 31 -- त्रिपुरा के बहुचर्चित चिटफंड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। पश्चिम त्रिपुरा जिले के अगरतला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने एक निजी कंपनी और उसके तीन शीर्ष अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए छह-छह साल के सश्रम कारावास की सजा सुनायी है।
अदालत ने जिन आरोपियों को दोषी पाकर सजा सुनायी है, उनमें मेसर्स प्रगति शील इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स एंड सर्विसेज लिमिटेड के सीएमडी अरिंदम दास, निदेशक परितोष दास और प्रशासनिक निदेशक दीपशिखा चक्रवर्ती (दास) शामिल हैं। जेल की सजा के साथ-साथ अदालत ने इन तीनों दोषियों पर तीन-तीन लाख रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना भी लगाया है।
इसके अलावा आरोपी निजी कंपनी 'मेसर्स प्रगति शील इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स एंड सर्विसेज लिमिटेड' पर भी अलग से सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
यह पूरा मामला साल 2012 का है। त्रिपुरा राज्य सरकार और भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी अधिसूचनाओं के बाद सीबीआई ने आठ अक्तूबर 2013 को इस केस को अपने हाथ में लिया था। इससे पहले कैलाशहर थाने में 30 अप्रैल 2012 को मामला दर्ज किया गया था।
इन पर आरोप था कि आम जनता से निवेश के नाम पर करीब पांच से छह करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जुटायी थी। इसके बाद उन्होंने न तो निवेशकों के पैसे वापस किये और न ही जमा राशि का सही इस्तेमाल किया, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई की हेराफेरी कर उनके साथ धोखाधड़ी की। गहन जांच के बाद सीबीआई ने 28 मई 2018 को इन तीनों अधिकारियों और कंपनी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
विशेष सीबीआई अदालत ने अपने फैसले में पीड़ितों को राहत देने के लिए एक अहम आदेश भी जारी किया है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि दोषियों से जुर्माने के रूप में वसूली गयी पूरी राशि को सक्षम अधिकारियों के पास भेजा जाए। इसके बाद, उनाकोटी जिले (मुख्यालय कैलाशहर) के जिलाधिकारी के माध्यम से पीड़ित जमाकर्ताओं के बीच इस राशि को उनके अनुमंडल की आवश्यकताओं के अनुसार आनुपातिक रूप से वितरित किया जायेगा।
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