अगरतला , जून 05 -- त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने केंद्र से पूर्वोत्तर को भारत का 'हरित औद्योगिक केंद्र' बनाने का सुझाव दिया।

डॉ. साहा ने गुरुवार को शिलांग में उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) के 73वें पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए पूर्वोत्तर में निवेश को बढ़ावा देने हेतु प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रणनीतिक मौकों, चुनौतियों और आर्थिक विकास के उपायों पर बात की। उन्होंने अगरतला और चटगांव के बीच सीधी उड़ान सेवा शुरू करने, बदरपुर-सबरूम डबल-लाइन रेलवे परियोजना में तेजी लाने और प्राकृतिक गैस की कीमतों पर 40 प्रतिशत की छूट देने की मांग की।

मुख्यमंत्री ने 'ईस्टर्न स्टार्ट-अप गलियारा' बनाने, 'पूर्वोत्तर औद्योगिक मुक्त व्यापार प्राधिकरण' स्थापित करने, सीमा-पार क्लस्टर कूटनीति को बढ़ावा देने, कई राज्यों में 'उत्तर-पूर्व कौशल विश्वविद्यालय' बनाने और सामुदायिक स्वामित्व व सामाजिक रूप से जागरूक निवेश के जरिए पर्यटन को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।

उन्होंने आईटी पार्क बनाने की वकालत करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों व राज्यपालों की मौजूदगी में 'पहाड़ों का गौरव' योजना के तहत त्रिपुरा के लिए सालाना धन को 3,450 करोड़ रुपये से बढ़ाकर कम से कम 6,000 करोड़ रुपये करने का सुझाव दिया।

डॉ. साहा ने त्रिपुरा के बड़े सामाजिक-आर्थिक विकास का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और अमित शाह के समर्थन को दिया। उन्होंने बताया कि पिछले छह वर्षों में राज्य का 'सकल राज्य घरेलू उत्पाद' (जीएसडीपी) दोगुना हो गया है और प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के बराबर पहुंच गई है।

उन्होंने बताया कि पिछले आठ वर्षों में त्रिपुरा को 350 से अधिक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सम्मान मिले हैं। इसका श्रेय विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति और निवेश आकर्षित करने में राज्य की कामयाबी को जाता है। पिछले साल 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ और 8,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

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