नयी दिल्ली/अगरतला , जुलाई 14 -- त्रिपुरा के हथकरघा, हस्तशिल्प एवं जनजातीय कल्याण मंत्री विकास देववर्मा ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात कर राज्य के वस्त्र, हथकरघा, हस्तशिल्प और रेशम उद्योग के विकास पर चर्चा की।

बैठक के दौरान श्री देववर्मा ने राज्य के पारंपरिक उद्योगों को सशक्त बनाने तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी उपस्थिति बढ़ाने के उद्देश्य से कई रणनीतिक प्रस्ताव प्रस्तुत किये। इनमें राज्य में एकीकृत टेक्सटाइल पार्क, सिल्क पार्क, राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी), भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएचटी) और केंद्रीय सिल्क रीलिंग स्कूल (सीएसआरएस) की स्थापना शामिल है।

श्री देववर्मा ने बांस, अनानास और केले के रेशे पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, शिल्प ग्राम और हस्तशिल्प संग्रहालय विकसित करने, निर्यात अवसंरचना सुदृढ़ करने तथा कारीगरों, बुनकरों और उद्यमियों के लिए संस्थागत क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों का उद्देश्य त्रिपुरा के हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को 'विकसित भारत 2047', 'वोकल फॉर लोकल', 'मेक इन इंडिया' और 'टेक्सटाइल्स फॉर ग्लोबल मार्केट्स' जैसी राष्ट्रीय पहलों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि हथकरघा, बांस एवं बेंत शिल्प, रेशम उत्पादन और जनजातीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा के कारण त्रिपुरा देश की वस्त्र अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने की अपार संभावनाएं हैं।

बैठक के बाद श्री देववर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रस्तावित पहलें बुनकरों, कारीगरों, रेशम उत्पादकों, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा उद्यमियों के लिए नये अवसर सृजित करेंगी, जिससे रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक शिल्प एवं वस्त्र विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम करने तथा उन्हें देश और दुनिया में पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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