अगरतला , अगस्त 24 -- त्रिपुरा में रविवार को उस समय एक नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया जब सहकारिता मंत्री शुक्ला चरण नोआटिया ने अगरतला में 'इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ़ त्रिपुरा' (आईपीएफटी) की एक रैली में हिस्सा लिया और अलग राज्य की मांग की।

अलग राज्य की वकालत करने वाले कार्यक्रम में मौजूदा मंत्री की भागीदारी की आलोचना हुई है और इससे तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गयी है, खासकर इसलिए क्योंकि आईपीएफटी त्रिपुरा की सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है। आईपीएफटी के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी रैली और जनसभा में नोआटिया के साथ हिस्सा लिया।

यह घटना एक बार-बार उठने वाले मुद्दे को उजागर करती है और राज्य सरकार का हिस्सा रहते हुए अलग राज्य की वकालत करने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने को लेकर तनाव पैदा करती है। विवाद तब और बढ़ गया जब ऐसी खबरें आयी कि कार्यक्रम के लिए पार्टी के झंडे और अन्य सजावट का सामान मंत्री के सरकारी आवास पर तैयार किया गया था।

विपक्षी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस ने राजनीतिक पार्टी की गतिविधियों के लिए सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल के औचित्य पर चिंता जतायी, जिसमें आदिवासी आबादी के लिए अलग राज्य की मांग की गयी थी। इस घटनाक्रम ने अलग राज्य की मांग के समय को लेकर चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है।

कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने कहा कि चुनाव के समय ऐसी मांगें ज़्यादा उठती हैं, लेकिन साल भर त्रिपुरा विधानसभा में इन पर कम ही चर्चा होती है।

गांवों में चुनाव नज़दीक हैं और आईपीएफटी के नए सिरे से शुरू हुए अभियान ने इस बात की अटकलों को हवा दी है कि पार्टी अपने मुख्य आदिवासी वोट बैंक से फिर से जुड़ने और अपना समर्थन आधार मज़बूत करने की कोशिश कर रही है।

यह घटनाक्रम त्रिपुरा के सत्ताधारी गठबंधन में शामिल आदिवासी पार्टियों के बीच मतभेदों को भी उजागर करता है। एक और प्रभावशाली आदिवासी राजनीतिक संगठन, टिपरा मोथा, सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा रहते हुए भी राज्य की मूल निवासी आबादी के लिए ज़्यादा संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की मांग करता रहा है।

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