अगरतला , अगस्त 23 -- त्रिपुरा के पूर्व बिजली मंत्री और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के वरिष्ठ नेता माणिक डे ने बिजली की बढ़ी हुई दरों का बोझ उठाने के सरकार के फैसले की सराहना की है। इसके साथ ही उन्होंने बिजली क्षेत्र में वित्तीय नुकसान और संरचनात्मक सुधारों पर भी ध्यान देने की बात कही है।

श्री डे ने सरकार से इस राहत की अवधि के बारे में स्पष्ट समय-सीमा मांगी है और 362 करोड़ रुपये की राशि के बारे में सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि यह राशि बिजली नियामक आयोग द्वारा मंजूर की गई राजस्व-अंतर की वसूली की पहली किस्त में शामिल नहीं थी।

दो दिन पहले राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि वह बिजली की बढ़ी हुई दरों पर 100 प्रतिशत सब्सिडी देगी। यह सब्सिडी मई से लागू होगी और सितंबर से नवंबर के बीच बिजली बिलों में इसे समायोजित किया जाएगा।

हालांकि श्री डे ने सब्सिडी को स्थायी समाधान मानने के खिलाफ चेतावनी दी है। उनका कहना है कि इसकी घोषणा बिजली के बढ़ते बिलों को लेकर लगातार हो रहे जन-विरोध के कारण की गई है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि क्या नियामक आयोग द्वारा वसूली के लिए मंजूर की गई पूरी रकम इसमें शामिल है या नहीं। उन्होंने चिंता जताई कि इससे उपभोक्ताओं के हितों पर बुरा असर पड़ सकता है और टैरिफ से जुड़े आदेशों के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की संभावना भी जताई।

श्री डे ने औसत टैरिफ में हुई भारी बढ़ोतरी की ओर ध्यान दिलाया है। इसमें अलग-अलग तरह के चार्ज भी शामिल हैं। 2018 से पहले यह दर 3.99 रुपये प्रति यूनिट थी, जो अब बढ़कर 7.61 रुपये हो गई है, यानी इसमें 90.70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने ड्यूटी और फिक्स्ड चार्ज समेत कई तरह के चार्ज लागू करने और उन्हें बढ़ाने पर भी सवाल उठाए हैं।

पूर्व मंत्री ने राज्य सरकार द्वारा बिजली शुल्क वसूलने और उसके इस्तेमाल के तरीके में पारदर्शिता की मांग की और स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि नए स्मार्ट मीटर लगने के बाद ग्राहकों ने असामान्य रूप से ज़्यादा रीडिंग की शिकायत की है और मीटर लगाने एवं उनके रखरखाव में निजी कंपनियों की भूमिका पर सवाल उठाए।

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