अगरतला , जुलाई 21 -- त्रिपुरा सरकार ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनखड़ की याद में एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। वह अपने कार्यालय के वॉशरूम में लटके पाये गये थे।
मंगलवार को सभी सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और कोई भी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं होगा।
कल रात कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद त्रिपुरा सरकार ने त्रिपुरा कैडर के 1999 बैच के आईपीएस अधिकारी और मौजूदा अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) जी एस राव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया है।
शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि श्री धनखड़ ने अपनी पत्नी के स्कार्फ का इस्तेमाल कर खुदकुशी की, जिसे वह पूरी वर्दी पहनकर काम पर आते समय साथ लाये थे। रिपोर्टों में कहा गया है कि परंपरा के मुताबिक सोमवार को पुलिस मुख्यालय में पुलिस प्रमुख को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था, जो हमेशा की तरह हुआ था।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुबह करीब 10:15 बजे गार्ड ऑफ ऑनर मिलने के बाद डीजीपी ने जरूरी काम और पेट की समस्या का हवाला देते हुए अपने निजी सचिव (पीएस) को सुबह 11:00 बजे तक किसी को भी अपने कार्यालय में आने की अनुमति न देने का निर्देश दिया। सुबह लगभग 10:30 बजे कुछ अधिकारियों ने डीजीपी से मिलने की कोशिश की, लेकिन डीजीपी के निर्देशों के अनुसार पीएस ने उन्हें भीतर जाने से मना कर दिया।
11:00 बजे और इंटरकॉम तथा मोबाइल फोन पर कोई जवाब नहीं मिला, तो पीएस बाहर इंतजार कर रहे दो अधिकारियों के साथ डीजीपी के दफ्तर में दाखिल हुआ, जहां उन्होंने पाया कि उनकी कुर्सी खाली थी। दरवाजे पर खड़े अर्दली ने बताया कि डीजीपी काफी देर से वॉशरूम में हैं, जिससे शक पैदा हुआ।
वॉशरूम का दरवाजा खटखटाने की बार-बार कोशिशों के बावजूद जब कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने अधिकारियों को सूचित किया और दरवाजा तोड़ने के लिए बढ़ई को बुलाया। करीब 11:30 बजे जब दरवाजा जबरन खोला गया, तो उन्होंने श्री धनखड़ को वॉशरूम में एक छड़ से स्कार्फ के सहारे लटका पाया; पास ही एक साइड टेबल पलटी पड़ी थी, जिसका इस्तेमाल इस कदम के लिए किये जाने की आशंका थी। जांचकर्ताओं ने ध्यान दिया कि पूरी वर्दी पहनने के बावजूद वह नंगे पैर थे।
मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, मुख्य सचिव जे के सिन्हा, गृह सचिव अभिषेक सिंह और मुख्यमंत्री के सचिव किरण गिट्टे मौके पर पहुंचे। पश्चिम अगरतला पुलिस और फोरेंसिक टीम के पहुंचने के बाद श्री धनखड़ के शव को नीचे उतारा गया और अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज और जीबीपी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें लाते ही मृत घोषित कर दिया।
रिपोर्टों से पता चलता है कि घटना से पहले कई दिनों से श्री धनखड़ का व्यवहार असामान्य था और घटना से एक रात पहले उनका पत्नी से विवाद हुआ था। वह और उनकी पत्नी अगरतला में अकेले थे, क्योंकि उनका इकलौता बेटा कनाडा में रहता है।
हाल ही में डीजीपी के रूप में दो वर्ष के कार्यकाल के अनिवार्य प्रावधान के तहत श्री धनखड़ को उनकी 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति उम्र के बाद एक साल का सेवा विस्तार दिया गया था। राज्य सरकार से उनके आमतौर पर सकारात्मक संबंध थे, लेकिन उनके कुछ परिचित बताते हैं कि वह कभी-कभी भ्रष्ट गतिविधियों, विशेष रूप से मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल कुछ क्षेत्र के अधिकारियों से समर्थन की कमी महसूस करते थे।
डीजीपी के रूप में अपने एक वर्ष से भी कम के छोटे कार्यकाल में उन्होंने ड्रग नेटवर्क में शामिल होने के संदिग्ध डीएसपी और निरीक्षकों सहित कई पुलिसकर्मियों को निलंबित किया था। डीजीपी को अक्सर पुलिस अधीक्षकों (एसपी) और थाना प्रभारियों (ओसी) के साथ सीधे संवाद करने की आवश्यकता होती थी, जो कभी-कभी उन्हें असहज कर देता था।
पोस्टमार्टम के बाद श्री धनखड़ का पार्थिव शरीर उनके आधिकारिक निवास पर स्थानांतरित कर दिया गया। कल रात उनके बड़े भाई विवेक धनखड़ और अन्य रिश्तेदार अगरतला पहुंचे। उनके बेटे के कनाडा से आने का इंतजार करते हुए उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए अगरतला से एक चार्टर्ड प्लेन से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के अंतर्गत उनके पैतृक गांव बिहारीपुर ले जाया गया।
अपने बेटे, पत्नी और भाइयों के अलावा श्री धनखड़ के परिवार में उनकी 80 वर्षीय मां भी हैं, जो गांव में रहती हैं।
गहरे दुख के साथ त्रिपुरा पुलिस के जवानों ने आज सुबह उनका ताबूत सिविल सचिवालय ले जाने से पहले पुलिस मुख्यालय में श्री धनखड़ को अंतिम श्रद्धांजलि दी। वहां पूर्व डीजीपी को सम्मान देने के लिए राज्य कैबिनेट के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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