अगरतला , सितंबर 23 -- त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने से जुड़े अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराए गए चार बंगलादेशी नागरिकों की सजा घटाकर उनके द्वारा हिरासत में बिताई जा चुकी अवधि के बराबर कर दी है और उन्हें बंगलादेश वापस भेजने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति डॉ. टी. अमरनाथ गौड़ ने आरोपियों की ओर से दायर तीन आपराधिक अपीलों पर सुनवाई पूरी करते हुए यह आदेश दिया। चारों बंगलादेशी नागरिकों को उचित यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश करने के लिए विदेशी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया था।
दो अपीलकर्ताओं रतिलाल दास और उनकी पत्नी बिनीता रानी दास को फरवरी 2025 में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने उनाकोटि जिले में श्रीरामपुर मनु पुल के पास अन्य लोगों के साथ हिरासत में लिया था। कैलाशहर की सत्र अदालत ने उन्हें दो वर्ष के कठोर कारावास के साथ जुर्माने की सजा सुनाई थी।
अलग-अलग अपीलों में बंगलादेशी नागरिक लीजा और मंसूरा अख्तर ने धलाई जिले के अंबासा रेलवे स्टेशन पर अक्टूबर 2024 में पकड़े जाने के बाद अंबासा की सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती दी थी। दोनों ने निचली अदालत के समक्ष अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के इस रुख को ध्यान में रखा कि उसे दोनों को शेष सजा पूरी कराने के बजाय बांग्लादेश वापस भेजे जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि चारों अपीलकर्ताओं का पहले कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। इसके बाद न्यायालय ने उनकी सजा को अब तक हिरासत में बिताई गई अवधि के बराबर कर दिया और शेष कारावास की सजा माफ कर दी।
न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उन्हें बांग्लादेश वापस भेजने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। तब तक वे हिरासत में रहेंगे, लेकिन उन्हें दोषसिद्ध व्यक्ति के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाएगा।
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