पटना , जुलाई 11 -- पटना स्थित बापू टावर संग्रहालय के सभागार में शनिवार को बिहार सरकार के पूर्व मुख्य सचिव तथा लेखक त्रिपुरारी शरण के उपन्यास 'अन्तिम आश्रय' पर परिसंवाद का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत में बापू टावर के निदेशक विनय कुमार ने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बापू टावर सिर्फ संग्रहालय नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक संवाद के मंच के रूप में भी उभर कर सामने आया है। बातचीत को आगे बढ़ाते हुए ए.एन. कॉलेज पटना के सहायक प्रोफेसर कुमार वरुण ने कहा कि इस उपन्यास में मानवीय रिश्तों की सुक्ष्म पड़ताल की गई है जो चरित्रों के माध्यम से बखूबी उकेरी गई है।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए संस्कृतिकर्मी अनीश अंकुर ने कहा कि यह उपन्यास सौ-सवा सौ साल के कालखंड के उथल पुथल को सामने रखती है। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर रामज्ञा राय शशिधर ने इस उपन्यास को प्रेमचंद की भारतीय परंपरा से युक्त बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक तरुण कुमार ने कहा कि यह उपन्यास रिश्तों और पारिवारिक सम्बन्धों के व्यापक बदलाव को पकड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि यह उपन्यास जीवन के विविध प्रसंगों का रोचक वर्णन करता है।

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