हैदराबाद , जून 01 -- तेलंगाना अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने सोमवार को 'डाफाबेट' प्लेटफॉर्म से जुड़े एक ऑनलाइन सट्टेबाजी रैकेट के सिलसिले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें गुजरात के दो मुख्य आयोजक और एक अफगान नागरिक शामिल हैं।
सीआईडी के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार, यह नेटवर्क कई राज्यों में फैले म्यूल बैंक खातों, फर्जी कंपनियों और तकनीकी सहायता टीमों के फैले कॉम्पलेक्स वेब नेटवर्क के जरिये काम कर रहा था।
तेलंगाना सीआईडी महानिदेशक चारू सिन्हा ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप और उनसे जुड़े धोखाधड़ी के मामलों की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था जिसने यह मामला उजागर किया है।करीमनगर के एक निवासी की शिकायत के बाद जांच में तेजी आयी, जिसने 'डाफाबेट प्लेटफॉर्म' पर सट्टेबाजी के चक्कर में करीब 10 लाख रुपये गंवा दिये थे। सुश्री सिन्हा के अनुसार, डाफाबेट की शुरुआत 2004 में फिलीपींस में हुई थी। इसके बाद इसका संचालन यूनाइटेड किंगडम (यूके) से होने लगा। इस मामले में गिरफ्तार किये गये दो मुख्य आयोजक दिल्ली और दुबई दोनों जगहों से अपना दफ्तर चला रहे थे। उन्होंने बताया कि आरोपी लेन-देन पर लगभग 1.5 प्रतिशत का कमीशन कमाते थे। इससे उन्हें रोजाना अनुमानित आठ से 10 लाख रुपये का मुनाफा होता था।
सीआईडी ने 46 म्यूल बैंक खातों से जुड़े लेन-देन के आठ स्तरों के माध्यम से इस खेल का पता लगाया है। संदिग्धों की पहचान करने के लिए जांचकर्ताओं ने मोबाइल फोन, ईमेल खातों और बैंकिंग रिकॉर्ड के फोरेंसिक विश्लेषण का सहारा लिया है। सुश्री चारू सिन्हा ने बताया कि इस पूरे अभियान में करीब छह महीने का समय लगा। इस दौरान करीब 40 कर्मियों वाली सीआईडी की छह विशेष टीमों ने गुजरात, पंजाब और दिल्ली में छापेमारी की। पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी अपने मोबाइल फोन, सिम कार्ड और ठिकाने लगातार बदलते रहते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुख्य आयोजक मनीष सिंह (24) और अभिषेक सिंह (26) के रूप में हुई है। इनके अलावा गुजरात के तकनीकी सहायता दल के अजीत सिंह (27), विजय पाटीदार (25), युगल पाटीदार (25) और प्रतीक प्रवीन भाई (25), नयी दिल्ली के इग्नेशियस दास (27), अभिषेक वाधवा (27) तथा अफगान नागरिक मोहम्मद हलीम (24) एवं पंजाब के लव कुमार और सिमरप्रीत सिंह शामिल हैं।
सीआईडी प्रमुख ने बताया कि नेटवर्क के भीतर सभी आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाएं थीं। इनमें से दो मुख्य आयोजक के रूप में काम कर रहे थे, वहीं तीन आरोपी कमीशन के लिए म्यूल बैंक खातों का इंतजाम करते थे। इनके अलावा दो आरोपियों ने सट्टेबाजी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए फर्जी कंपनियां बनायी थीं और चार आरोपी इस पूरे खेल के लिए तकनीकी सहायता दे रहे थे। उन्होंने बताया कि मामले में गिरफ्तार अफगान नागरिक मोहम्मद हलीम म्यूल बैंक खातों की व्यवस्था करने में शामिल था।
इस कार्रवाई के दौरान जांचकर्ताओं ने तीन लग्जरी गाड़ियां (एक बीएमडब्ल्यू, एक मर्सिडीज-बेंज और एक किआ सेल्टोस) जब्त की हैं। साथ ही आठ लैपटॉप, दो आईपैड, 26 मोबाइल फोन, पांच पासपोर्ट और नकदी भी बरामद की गयी है। सुश्री सिन्हा ने बताया कि डाफाबेट क्रिकेट मैचों पर सट्टेबाजी, ऑनलाइन कैसीनो गेम्स और 'एविएटर' गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिये लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता था। पीड़ितों को पहले शुरुआत में जीत का लालच दिया जाता था और बाद में उन्हें बड़ा दांव लगाने के लिए उकसाया जाता था, जिससे आखिरकार उन्हें भारी-भरकम आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि डफाबेट के खिलाफ आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना में 225 शिकायतें और 73 मामले दर्ज किये गये हैं।
सीआईडी के आंकड़ों के मुताबिक, अकेले तेलंगाना में ही इस प्लेटफॉर्म से जुड़े करीब 414 मामले सामने आ चुके हैं। नागरिकों से ऑनलाइन सट्टेबाजी से दूर रहने की अपील करते हुए उन्होंने इसे पूरी तरह गैरकानूनी और लत लगने वाला खेल बताया।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सट्टेबाजी ऐप का विज्ञापन या प्रमोशन करने वाले मशहूर कलाकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका की भी जांच की जा रही है लेकिन अभी तक किसी फौरी कार्रवाई की घोषणा नहीं की गयी है।
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