हैदराबाद , मई 28 -- तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने और राज्य को 'ग्रीन एनर्जी हब' (हरित ऊर्जा केंद्र) में बदलने के लिए बड़े कदम उठा रही है।
उपमुख्यमंत्री ने खम्मम जिले के बोनाकल मंडल के दौरे के दौरान 'आदर्श सौर ग्राम' पहल के तहत छतों पर स्थापित सौर प्रणालियों का उद्घाटन किया और किसानों के खेतों में सौर ऊर्जा से चलने वाले कृषि पंप सेटों की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत बोनाकल और कोडंगल मंडलों को पूरी तरह से सौर ऊर्जा संचालित मंडलों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
श्री विक्रमार्क ने कहा कि रूफटॉप सोलर पैनल से बिजली के बिलों को कम करने में मदद मिलेगी, जबकि इससे परिवारों के लिए अतिरिक्त मासिक आय भी पैदा होगी। उन्होंने कहा कि किसान कृषि खेतों में लगाए गए सौर पंप सेटों से अधिशेष बिजली उत्पादन के माध्यम से भी आय अर्जित कर सकते हैं।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने 81 गांवों की पहचान 'मॉडल सोलर विलेज' के रूप में की है और वह किसानों तथा ग्रामीण परिवारों को सौर योजनाओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रबंधन में महिला स्वयं सहायता समूहों को शामिल किया जा रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र का जिक्र करते हुए, श्री विक्रमार्क ने कहा कि तेलंगाना की बिजली की मांग वर्ष 2023-24 के 15,000 मेगावाट से बढ़कर 18,542 मेगावाट हो गई है, लेकिन सरकार ने अग्रिम योजना और बुनियादी ढांचे को मजबूत करके निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की है।
कृषि के मुद्दे पर, उपमुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार बारिश से भीगे धान को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदेगी। उन्होंने बताया कि मक्का खरीद के लिए 5,000 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य सरकार के बार-बार अनुरोध के बावजूद वह खरीदे गए अनाज को उठाने में विफल रही है।
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