हैदराबाद , अगस्त 31 -- तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में राज्य सरकार एक सितंबर को अपने कार्यकाल के 1,000 दिन पूरे करने जा रही है। इस अवसर पर राज्य को विश्वस्तरीय अर्थव्यवस्था के रूप में बदलने के उद्देश्य से शुरू की गयी कई जनकल्याणकारी, विकासात्मक और प्रशासनिक पहलों और अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया जायेगा।
राज्य सरकार की ओर से रविवार रात एक बयान में कहा गया कि इस अवधि में जनकल्याण, विकास और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
इसमें कृषि, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचा, उद्योग और डिजिटल गवर्नेंस जैसी प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। प्रमुख उपलब्धियों में 25 लाख से अधिक किसान परिवारों को लाभ पहुंचाने वाली दो लाख रुपये तक की फसल ऋण माफी, 'रैथु भरोसा' योजना के तहत 36,000 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण और 32 महीनों के दौरान कृषि तथा किसान कल्याण पर लगभग 1.68 लाख करोड़ रुपये का खर्च शामिल है। इसके अलावा, तेलंगाना धान की खेती और उत्पादन में पंजाब से आगे निकल गया है, जबकि तेलंगाना के चावल के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का विस्तार करने के कदम भी उठाये गये हैं।
जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत, 'महालक्ष्मी' योजना में महिलाओं ने 335 करोड़ से अधिक नि:शुल्क यात्राएं की, जबकि 'गृह ज्योति' योजना के तहत 53 लाख से अधिक परिवारों को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिला है। लगभग 43 लाख परिवारों को 500 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार ने 15 लाख से अधिक नये राशन कार्ड भी जारी किये हैं और खाद्य सुरक्षा के दायरे को बढ़ाकर लगभग 3.38 करोड़ लोगों तक पहुंचाया है।
बयान में कहा गया है कि पहले चरण में 4.5 लाख 'इंदिरम्मा' आवासों का निर्माण शुरू किया गया है, जिसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता दी जा रही है। वर्तमान में 43.01 लाख लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है, जबकि अतिरिक्त 2.25 लाख लोगों को इस पेंशन योजना के दायरे में लाया गया है।
सामाजिक न्याय के मोर्चे पर, सरकार ने 1.12 करोड़ से अधिक परिवारों को शामिल करने वाले व्यापक सामाजिक-आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार और जातिगत सर्वेक्षण, 59 अनुसूचित जाति (एससी) उप-जातियों को तीन समूहों में वर्गीकृत करने तथा शिक्षा, रोजगार और राजनीति में पिछड़ों (बीसी) के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाले विधेयकों को विधानसभा से मंजूरी दिये जाने का उल्लेख किया, जिन्हें केंद्र सरकार के पास भेजा गया है।
शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में, सरकार ने 'मेगा डीएससी' के माध्यम से 10,006 शिक्षकों की भर्ती, 72,000 से अधिक सरकारी नौकरियों में नियुक्तियां, लगभग 11 लाख छात्रों के लिए छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति और 'यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी' की स्थापना का जिक्र किया। बयान में यह भी कहा गया कि विभिन्न संस्थानों और पहलों के माध्यम से 90,000 से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में, सरकार ने 'राजीव आरोग्यश्री' योजना के तहत कवर की सीमा पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी है, टीम्स सनतनगर का उद्घाटन किया है तथा अलवाल और एलबी नगर में सुपर-स्पेशियल्टी अस्पतालों की घोषणा की है। नौ नये सरकारी मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन किया जा चुका है, जबकि अन्य 17 निर्माणाधीन हैं। गोशामहल में लगभग 2,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 2,000 बिस्तरों वाले नए उस्मानिया अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है।
सरकार ने खाद्य अपमिश्रण और नशीली दवाओं के खतरे से निपटने के लिए 'टी-सेफ' की स्थापना, मादक पदार्थों के खिलाफ 'ईगल' प्रणाली, साइबर अपराध पुलिसिंग तथा 1930 रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करने और 'शी टीम्स', 'भरोसा केंद्र' और 'मानव तस्करी रोधी इकाइयों' से जुड़ी सुरक्षा पहलों का भी उल्लेख किया।
प्रशासनिक सुधारों के अंतर्गत 'भू भारती अधिनियम', 'भूधार' भूमि पहचान, 'प्रजा पालना' और 'प्रजा वाणी' जन-शिकायत निवारण प्रणालियां, सचिवालय के 36 विभागों में 100 प्रतिशत ई-ऑफिस का क्रियान्वयन और देश की पहली पूरी तरह से डिजिटल कैबिनेट बैठक शामिल है। व्हाट्सऐप के जरिये 581 से अधिक सरकारी सेवाएं उपलब्ध करायी गयी हैं। बुनियादी ढांचे पर, सरकार ने 360 किमी लंबे क्षेत्रीय रिंग रोड, सात गलियारों में 122.9 किमी हैदराबाद मेट्रो विस्तार, 6,092 किमी एचएएम सड़कों के विकास, मामनूर हवाई अड्डे के पुनरुद्धार और आदिलाबाद में संयुक्त उपयोग वाले हवाई क्षेत्र की योजनाओं की जानकारी दी है।
सरकार के अनुसार, 'हाइड्रा' ने 1,045 एकड़ भूमि का अतिक्रमण हटाया है और लगभग 60,000 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी संपत्तियों की रक्षा की है।
सरकार ने कहा कि तेलंगाना ने बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया है, जिसमें 'टीजी-आईपास' के जरिये 1.29 लाख करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी गयी है, जबकि 'तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट-2025' में 5.75 लाख करोड़ रुपये मूल्य के समझौता पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये।
वर्ष 2025-26 में आईटी निर्यात 3.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें प्रत्यक्ष आईटी रोजगार 12.14 लाख दर्ज किया गया। इस बीच हैदराबाद वैश्विक क्षमता केंद्रों, डेटा केंद्रों, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है।
सरकार ने प्रस्तावित 'भारत फ्यूचर सिटी' का भी उल्लेख किया, जिसे देश के पहले नेट-जीरो स्मार्ट शहर तथा एआई, डेटा सेंटर, उन्नत निर्माण, अनुसंधान और नवाचार के केंद्र के रूप में नियोजित किया गया है।
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