हैदराबाद , जनवरी 31 -- तेलंगाना में राज्य महिला सुरक्षा विंग की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक चारू सिन्हा ने बताया कि बाल मजदूरी को खत्म करने और लापता बच्चों का पता लगाने के मकसद से चलाए गए एक महीने के विशेष अभियान 'ऑपरेशन स्माइल-12' के तहत राज्य में 5,582 बच्चों को मुक्त कराया गया।
सुश्री चारू सिन्हा ने कहा कि यह अभियान 1 से 31 जनवरी तक केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में 121 सब-डिविजनल पुलिस टीमों और लगभग 605 पुलिसकर्मियों की भागीदारी से चलाया गया। यह अभियान महिला एवं बाल कल्याण, श्रम और स्वास्थ्य विभागों, बाल कल्याण समितियों और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर चलाया गया।
उन्होंने कहा कि 29 दिसंबर को राज्यस्तरीय समन्वय बैठक हुई, जिसमें अधिकारियों को किशोर न्याय अधिनियम और बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड, ईंट भट्टों, मैकेनिक दुकानों और चाय की दुकानों सहित संवेदनशील जगहों पर गहन निरीक्षण किया गया।
उल्लेखनीय है कि बाल मजूदरी से मुक्त किए गए बच्चों में 5,108 लड़के और 474 लड़कियां हैं। कुल बच्चों में से 2,292 बच्चे बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और आंध्र प्रदेश सहित लगभग 15 राज्यों के हैं, जबकि 43 बच्चे पड़ोसी देश नेपाल के हैं। 4,567 बच्चों की पहचान बाल मजदूर के रूप में, 486 की सड़क पर रहने वाले बच्चों के रूप में, 38 की भिखारी के रूप में और 491 बच्चों को शोषण के अन्य रूपों में पाया गया।
बच्चों को काम पर रखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई, जिसके परिणामस्वरूप 1,480 प्राथमिकी दर्ज की गईं और 1,483 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। श्रम विभाग ने न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत 1,363 निरीक्षण रिपोर्ट जारी कीं और कुल 41.78 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
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