बीजापुर , अक्टूबर 05 -- छत्तीसगढ़ के बीजापुर से विधायक विक्रम मंडावी ने सोमवार को कहा कि बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों से विस्थापित होकर तेलंगाना में रह रहे आदिवासी परिवारों को भूमि का स्थायी पट्टा और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि तीनों जिलों के करीब 50 से 60 हजार आदिवासी तेलंगाना में विस्थापित हैं।

श्री मंडावी ने शनिवार और रविवार को तेलंगाना का दो दिवसीय दौरा कर विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे विस्थापित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने वेंकटचेरुवू, कंदीपडू, चिन्नासमुद्रम, चेरला, क्रांतिपुरम, रामचंद्रपुरम, मांगवाया, वेंकटपुरम, योगितानागरम, येटुरनगरम, भूपतपुरम, मांगपेटा, सलवा, मदुलगुडम, सुंदरनगर, उमेशचंद्रनागरम, मीरलापुरम, सरापका और भद्रचलम सहित विभिन्न बस्तियों का दौरा किया।

श्री मंडावी के अनुसार इन क्षेत्रों में बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों से विस्थापित अनेक आदिवासी परिवार पिछले 20 से 25 वर्षों से रह रहे हैं। मुलाकात के दौरान परिवारों ने भूमि का स्थायी पट्टा नहीं मिलने और विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं के लाभ से वंचित रहने की समस्या उनके सामने रखी।

विस्थापित परिवारों ने बताया कि वे लंबे समय से तेलंगाना सरकार से भूमि पट्टा और अन्य सरकारी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। उन्होंने अपने पैतृक गांवों और छत्तीसगढ़ में उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित समस्याएं भी विधायक के समक्ष रखीं। परिवारों ने बच्चों की शिक्षा, आजीविका और भविष्य को लेकर आ रही कठिनाइयों की जानकारी दी।

श्री मंडावी ने कहा, "कई वर्षों बाद अपनों के बीच आया हूं। अपनों से मिलना भावुक पल है।" उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों की समस्याओं को संबंधित सरकारों के समक्ष रखने और समाधान की दिशा में पहल की जाएगी।

दौरे के दौरान हुई चर्चा में विस्थापित आदिवासी परिवारों का एक प्रतिनिधिमंडल गठित करने पर सहमति बनी। यह प्रतिनिधिमंडल तेलंगाना और छत्तीसगढ़ सरकार के समक्ष भूमि के स्थायी पट्टे सहित अन्य मांगों और समस्याओं को रखेगा।

श्री मंडावी ने कहा कि विस्थापित परिवारों की प्रमुख मांग तेलंगाना में उनके निवास वाली भूमि का स्थायी पट्टा तथा सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में दोनों राज्यों की सरकारों से संवाद कर समाधान का प्रयास किया जाएगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित