हैदराबाद , सितंबर 16 -- तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार की 2026-27 के दौरान अतिरिक्त दो लाख एकड़ भूमि को बागवानी फसलों के अंतर्गत लाने की योजना है। इसमें विशेष रूप से ऑयल पाम (तेल ताड़) और फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को श्रेणी के आधार पर विभिन्न कृषि इनपुट और बुनियादी ढाँचे के लिए 70 से 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। इसमें पौध, मल्चिंग, शेड नेट, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, खेत तालाब, कोल्ड स्टोरेज और कृषि मशीनीकरण जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 के दौरान बागवानी विकास के लिए 150 करोड़ रुपये, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के लिए 243 करोड़ रुपये और ऑयल पाम के लिए 261 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से लगभग 1,000 करोड़ रुपये और विशेष रूप से बागवानी के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जा रहे हैं।
श्री राव ने ऑयल पाम के बारे में कहा कि 88,282 किसान 3.20 लाख एकड़ में इस फसल की खेती कर रहे हैं और तेलंगाना एनएमईओ-ओपी के तहत देश का शीर्ष राज्य बनकर उभरा है, जिसने 2021-22 से 2.74 लाख एकड़ जमीन को खेती के दायरे में लाया है। वर्ष 2026-27 के 85,000 एकड़ के लक्ष्य के मुकाबले, अब तक 29,053 एकड़ में पौधे लगाए जा चुके हैं।
सरकार पहले चार वर्षों के लिए पौधे, ड्रिप सिंचाई और इनपुट के लिए प्रति एकड़ 46,250 रुपये की सहायता प्रदान कर रही थी। उन्होंने कहा कि ऑयल पाम के गुच्छों की मौजूदा कीमत 24,025 रुपये प्रति टन थी, जबकि फैक्ट्री जोन आवंटित कंपनियों को ऑयल पाम अधिनियम के अनुसार उपज खरीदनी थी।
श्री नागेश्वर राव ने बताया कि 14 ऑयल पाम प्रसंस्करण कारखानों की पहचान की गई है, जिनमें से छह पहले से ही चालू हैं और शेष इकाइयों पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त मात्रा में पौधरोपण होने के आधार पर कारखाने स्थापित किए जाएंगे। लगातार कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कम से कम लगभग 10,000 से 15,000 एकड़ क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती आवश्यक होगी। इसके अलावा, सिद्दीपेट के नरमेट्टा में एक रिफाइनरी और आधुनिक पैकेजिंग केंद्र भी स्थापित किया जा रहा है।
उन्होंने सदस्यों को आश्वासन दिया कि सरकार विपणन और प्रसंस्करण की सुविधाएं सुनिश्चित करेगी, ताकि किसानों को नुकसान न उठाना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार केंद्र से न्यूनतम गारंटीकृत मूल्य (एमजीपी) की मांग कर रही है, ताकि किसानों को ऑयल पाम की खेती अपनाने के लिए अधिक भरोसा मिल सके।
मंत्री ने कहा कि ऑयल पाम को एक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली फसल के तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है, जो बंदरों के आतंक और अनियमित बारिश जैसी समस्याओं से निपटने में मदद कर सकती है। साथ ही, बारिश के पानी को बचाने और जमीन के नीचे के पानी के स्तर को बढ़ाने के लिए खेत में तालाब बनाने को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित