हैदराबाद , अक्टूबर 11 -- तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी की चुनाव आयोग समन्वय समिति के अध्यक्ष पुलिपति राजेश कुमार ने रविवार को पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआई) को लेकर चुनाव आयोग का बचाव करने पर सवाल उठाए और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर चिंता व्यक्त की।
एक बयान में श्री राजेश ने कहा कि यह अफ़सोस की बात है कि श्री नायडू ने बिना सोचे-समझे मतदाताओं के नाम हटाने को लेकर जताई गई चिंताओं को गलतफहमी बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से लोगों का भरोसा कम हो सकता है क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं योग्य मतदाता मतदाता सूची से बाहर न हो जाएं।
पश्चिम बंगाल में लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की खबरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल किया कि कितने प्रभावित मतदाताओं ने अपील की और कितनों को बाद में वोट देने का अधिकार वापस मिला।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तेलंगाना के मुशीराबाद निर्वाचन क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के बूथ लेवल एजेंटों ने पहले से भरे हुए 'फॉर्म-7' आवेदन जमा किए थे, जिनमें एक कांग्रेस बीएलए और उनके परिवार के सदस्यों सहित 31 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी ऐसी कोशिशें हुई हैं।
श्री राजेश ने श्री नायडू के उस अनुभव का भी उल्लेख किया जिसमें उन्हें 2002 के वोटर रिकॉर्ड के लिए एक एसआईआर नोटिस मिला था और बाद में उन्होंने उन राज्यों के अधिकारियों की मदद से वे रिकॉर्ड प्राप्त किए थे, जहां उन्होंने काम किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आम नागरिक भी पुराने चुनावी रिकॉर्ड पाने के लिए इसी तरह की मदद ले सकते हैं।
उन्होंने आग्रह किया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़ी चिंताओं का समाधान किया जाए और आम मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने में आने वाली दिक्कतों पर भी ध्यान दिया जाए।
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