हैदराबाद , अक्टूबर 23 -- तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक(डीजीपी) सी वी आनंद ने शुक्रवार को बंजारा हिल्स स्थित एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) में आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय पुलिस समन्वय समिति (एसआरपीसीसी) की बैठक में नशीले पदार्थों, साइबर अपराध, आतंकवाद और महिला सुरक्षा से निपटने के लिए राज्य की नवीन पुलिस पहलों को रेखांकित किया।

श्री आनंद ने कहा कि ग्रेहाउंड्स और विशेष खुफिया शाखा (एसआईबी) जैसे विशेष बलों ने वामपंथी उग्रवाद से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है, जबकि आतंकवाद से मुकाबले के लिए ऑक्टोपस बल की स्थापना की गयी है। उन्होंने बताया कि 2023 में शुरू किये गये नशीले पदार्थ विरोधी बल 'ईगल' को समर्पित मानव संसाधन और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया गया है। इस बल ने नशीले पदार्थों पर नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिणाम हासिल किये हैं। इसके अधिकारियों को 30 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन दिया गया है और सितंबर में इस बल को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। उन्होंने कहा कि कई अन्य नशीले पदार्थों पर प्रभावी नियंत्रण के बावजूद गांजे की समस्या अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (टीजीसीएसबी) की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डीजीपी ने कहा कि इसने ऑनलाइन धोखाधड़ी से निपटने, फर्जी सामग्री हटाने और पीड़ितों की धनराशि वापस दिलाने में अच्छे परिणाम दिए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर किये गये आकलन में भी ब्यूरो का प्रदर्शन अच्छा रहा है।

श्री आनंद ने कहा कि तेलंगाना ने बदलती सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप पुलिसकर्मियों की तैनाती में बदलाव किया है। इसके तहत वामपंथी उग्रवाद से निपटने वाली इकाइयों से करीब 100 कर्मियों को यातायात प्रबंधन, सड़क सुरक्षा, नशीले पदार्थों पर नियंत्रण और कानूनों के प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए दूसरी इकाइयों में तैनात किया गया है। उन्होंने करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से बने और अगस्त 2022 से काम कर रहे एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) को पुलिस समन्वय, पूरे राज्य में सीसीटीवी निगरानी, यातायात प्रबंधन और आपदा से निपटने के लिए एक प्रमुख केंद्र बताया।

उन्होंने करीब 1,000 कर्मियों वाली एक समर्पित यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा प्राधिकरण स्थापित करने की योजना की भी जानकारी दी। इस प्राधिकरण को वित्तीय स्वायत्तता देने और यातायात नियमों के उल्लंघन पर वसूले जाने वाले जुर्माने की कुल राशि का 40 प्रतिशत उसके संचालन के लिए निर्धारित करने का प्रस्ताव है।

श्री आनंद ने प्रौद्योगिकी आधारित स्मार्ट पुलिसिंग पहलों तथा मानव सुरक्षा और महिला सुरक्षा के लिए गठित समर्पित इकाई की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भरोसा केंद्रों पर पीड़ितों को एक ही छत के नीचे परामर्श, मनोवैज्ञानिक और चिकित्सा सहायता के साथ-साथ अभियोजन संबंधी सहयोग भी उपलब्ध कराया जाता है। इससे महिलाओं से जुड़े मामलों में दोषसिद्धि की दर में सुधार करने में मदद मिली है। महिलाओं की सुरक्षा मजबूत करने के लिए टी-सेफ एप्लिकेशन को भी एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

श्री आनंद ने कहा कि तेलंगाना उभरती चुनौतियों के अनुरूप अपनी पुलिसिंग रणनीतियों में बदलाव करता रहेगा और कानून प्रवर्तन, अपराध की रोकथाम तथा सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार के लिए अन्य राज्यों की प्रभावी कार्यप्रणालियों को अपनायेगा।

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