हैदराबाद , अगस्त 12 -- तेलंगाना की जेलों में बंद 78 कैदियों ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) का माध्यमिक स्कूल प्रमाण पत्र (एसएससी) हासिल कर लिया है। कारावास एवं सुधार सुविधाओं की महानिदेशक डॉ सौम्य मिश्रा ने बुधवार को यह जानकारी दी।
डॉ मिश्रा ने बताया कि यह राज्य में कैदियों की पहली ऐसी सफलता है। तेलंगाना जेल विभाग और एनआईओएस के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत 108 कैदियों ने माध्यमिक शिक्षा के लिए नामांकन करवाया था। उत्तीर्ण होने वाले कैदियों में 56 चेरलपल्ली सेंट्रल जेल से, 15 निज़ामाबाद सेंट्रल जेल से और सात हैदराबाद महिला कारागार से हैं।
इस समझौते के तहत विद्यार्थियों ने क्लास में नियमित पढ़ाई की तथा मॉक टेस्ट एवं प्री-बोर्ड परीक्षाएं दीं। इसमें सरकार की ओर से मुहैया करवाये गये शिक्षकों और अतिरिक्त पब्लिक स्कूल शिक्षकों ने सहायता की। इन विषयों का चयन सीखने में आसानी और रोजगार तथा आजीविका के अवसरों में उनकी व्यावहारिक उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए किया गया था। इनमें डेटा एंट्री ऑपरेटर से संबंधित कौशल भी शामिल हैं।
यहां सफल उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र वितरित करने के बाद आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. सौम्या मिश्रा ने उनके परिणामों को शिक्षा, आत्म-सुधार और पुनर्वास की दिशा में उनकी यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और सफल उम्मीदवारों को बधाई दी।
सफल कैदियों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और प्रतिबद्धता को देखते हुए महानिदेशक ने उन्हें विशेष प्रोत्साहन के रूप में 'महानिदेशक रियायत' देने की घोषणा की। यह रियायत उन सभी कैदियों को दी जाएगी, जिन्होंने एनआईओएस के माध्यम से एसएससी परीक्षा उत्तीर्ण की है, ताकि उन्हें शिक्षा और आत्म-सुधार जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सफल उम्मीदवारों को एनआईओएस के माध्यम से सीनियर सेकेंडरी (टेन प्लस टू) कार्यक्रम के तहत अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कुल 47 कैदियों ने एसएससी शिक्षा के लिए नए सिरे से नामांकन कराया है, जो उनकी शैक्षणिक यात्रा जारी रखने की इच्छा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि टेन प्लस टू की शिक्षा पूरी करने के बाद कैदी चेरलापल्ली सेंट्रल जेल स्थित डॉ. बी. आर. आंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी अध्ययन केंद्र के माध्यम से स्नातक बीए कार्यक्रम में भी दाखिला ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि सफल 78 उम्मीदवार सेंट्रल प्रिजन, चेरलापल्ली में स्थापित आईटीआई में विभिन्न पाठ्यक्रम करने के लिए भी पात्र हैं। इससे उन्हें तकनीकी और व्यावसायिक कौशल हासिल करने तथा रोजगार पाने की अपनी क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
कई कैदियों ने अपने जीवन पर शिक्षा के प्रभाव के बारे में बताया और आगे की पढ़ाई जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया। एक कैदी ने कहा कि वह एलएलबी तक पढ़ाई करना चाहता है और वकील बनने के बाद गरीब कैदियों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना चाहता है। एक अन्य कैदी ने बचपन में शिक्षा नहीं मिल पाने पर अफसोस जताया। उसने कहा कि शिक्षा के अभाव ने उसकी परिस्थितियों को कठिन बनाने में योगदान दिया और यदि उसे उचित शिक्षा मिली होती तो उसके जीवन की दिशा अलग हो सकती थी।
डॉ. मिश्रा ने तेलंगाना के जेल कैदियों के लिए शिक्षा को सुलभ बनाने में सहयोग के लिए एनआईओएस के अधिकारियों, जिनमें पूर्व क्षेत्रीय निदेशक परम्प्रीत सिंह और क्षेत्रीय निदेशक डॉ. प्रवीण चौहान शामिल हैं, का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने जेल अधिकारियों, शिक्षकों, कल्याण अधिकारियों, शिक्षा समन्वयकों और कर्मचारियों के प्रयासों की भी सराहना की, जिन्होंने कैदियों की पूरी शैक्षणिक यात्रा के दौरान उन्हें सहयोग और प्रोत्साहन दिया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित