हैदराबाद , अक्टूबर 23 -- तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 30 से 35 वर्ष की कई कामकाजी महिलाएं भविष्य में मां बनने की संभावना बनाये रखने और प्रजनन संबंधी विकल्प सुरक्षित रखने के लिए 'एग फ्रीजिंग' पर विचार कर रही हैं।

विशेषज्ञों ने शुक्रवार को कहा कि करियर संबंधी आकांक्षाएं, वित्तीय स्वतंत्रता और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं में बदलाव परिवार नियोजन के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं।

वारंगल स्थित काकतीय मेडिकल कॉलेज की ओर से आयोजित 'आधुनिक युग में सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) का बढ़ता चलन' विषयक कार्यशाला को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) कार्यक्रम के सलाहकार डॉ. नरेश पुरोहित ने कहा कि शिक्षा की लंबी अवधि, चुनौतीपूर्ण करियर, वित्तीय जिम्मेदारियां तथा सही जीवनसाथी मिलने या परिवार शुरू करने के उचित समय की प्रतीक्षा जैसे कारण कुछ महिलाओं को प्रजनन क्षमता सुरक्षित रखने के विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फर्टिलिटी एंड स्टेरिलिटी' में प्रकाशित हालिया वैज्ञानिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने व्यक्तिगत और पेशेवर लक्ष्यों को पूरा करने के साथ भविष्य में मां बनने के विकल्प को सुरक्षित रखने के लिए एग फ्रीजिंग को तेजी से एक विकल्प के रूप में देख रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में एग फ्रीजिंग का विकल्प चुनने वाली भारतीय महिलाओं की संख्या में सालाना लगभग 25 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।

फेडरेशन ऑफ रिप्रोडक्टिव हेल्थ सर्विसेज इंडिया (एफआरएचएसआई) के कार्यकारी सदस्य डॉ. पुरोहित ने कहा कि एग फ्रीजिंग केवल मशहूर हस्तियों या बड़े पदों पर काम करने वाले पेशेवरों तक सीमित विकल्प नहीं है, बल्कि यह एक चिकित्सकीय और व्यक्तिगत निर्णय है, जिस पर विभिन्न परिस्थितियों में महिलाएं विचार कर सकती हैं।

डॉ. पुरोहित ने कहा, "एग फ्रीजिंग किसी चलन का अनुसरण करने के बारे में नहीं, बल्कि यह समझने के बारे में है कि किसी व्यक्ति के लिए प्रजनन क्षमता सुरक्षित रखने का यह उपयुक्त विकल्प है या नहीं।" उन्होंने बताया कि कीमोथेरेपी या कुछ ऐसी चिकित्सकीय प्रक्रियाओं से गुजरने वाली महिलाओं को भी प्रजनन क्षमता सुरक्षित रखने पर विचार करने की सलाह दी जा सकती है, जिनसे अंडाशय की कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका हो।

इस प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि एग फ्रीजिंग में दवाओं के माध्यम से अंडाशय को उत्तेजित किया जाता है। इसके बाद रक्त जांच और अल्ट्रासाउंड के जरिए निगरानी की जाती है तथा चिकित्सकीय प्रक्रिया से परिपक्व अंडाणु निकाले जाते हैं। फिर चिकित्सकीय निगरानी में विट्रिफिकेशन नामक तकनीक का इस्तेमाल करके इन अंडाणुओं को जमा दिया जाता है।

उन्होंने आगाह किया कि एग फ्रीजिंग भविष्य में गर्भधारण या जीवित बच्चे के जन्म की गारंटी नहीं देती। महिलाओं को सामाजिक या पेशेवर दबाव के बजाय अपनी उम्र, प्रजनन स्वास्थ्य और भविष्य में परिवार शुरू करने की योजना के आधार पर पूरी जानकारी लेकर निर्णय लेना चाहिए।

उन्होंने कहा, "महिलाएं अंडाणुओं की एक सीमित संख्या के साथ जन्म लेती हैं और उम्र बढ़ने के साथ उनकी संख्या और गुणवत्ता, दोनों में गिरावट आती है। 30 वर्ष की उम्र के बाद यह गिरावट अधिक स्पष्ट होने लगती है।" उन्होंने बताया कि इसी कारण कुछ महिलाएं कम उम्र में ही अपने अंडाणु सुरक्षित रखने पर विचार करती हैं, क्योंकि उस समय भविष्य में उनके सफल इस्तेमाल की संभावना बेहतर हो सकती है।

विशेषज्ञों ने कहा कि व्यक्तिगत, पेशेवर, आर्थिक या चिकित्सकीय कारणों से गर्भधारण टालने की इच्छुक महिलाएं प्रजनन क्षमता सुरक्षित रखने के विकल्प पर विचार कर सकती हैं। हालांकि, हर कामकाजी महिला के लिए यह जरूरी नहीं है। निर्णय लेने से पहले प्रत्येक महिला की व्यक्तिगत परिस्थितियों का आकलन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रजनन विशेषज्ञ से परामर्श लेने से महिलाओं को अपने अंडाशय में उपलब्ध अंडाणुओं के भंडार, उम्र के साथ प्रजनन क्षमता में होने वाले बदलाव, परिवार शुरू करने से जुड़े लक्ष्यों और उपचार से मिलने वाले वास्तविक परिणामों को समझने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि सुरक्षित रखे गए अंडाणुओं के इस्तेमाल की सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है। इनमें अंडाणु फ्रीज कराते समय महिला की उम्र, सुरक्षित रखे गए अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता तथा भविष्य में उनके इस्तेमाल के समय महिला का प्रजनन स्वास्थ्य शामिल हैं।

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