निजामाबाद (तेलंगाना) , सितंबर 15 -- तेलंगाना में माओवादियों की वरिष्ठ नेता और डिवीजनल कमेटी मेंबर (डीसीएम) नक्का सुशीला रानी उर्फ लता ने लगभग 34 वर्षों के अज्ञातवास के बाद मंगलवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने इसे राज्य में माओवादी गतिविधियों के लिए एक और बड़ा झटका करार दिया है।

छत्तीसगढ़ के माड़ डिवीजनल कमेटी की 'शिक्षा विभाग समिति' में कार्यरत सुशीला रानी वर्ष 1992 में सीपीआई (एमएल) पीपुल्स वॉर में शामिल हुई और आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में सक्रिय रहीं। वह 'मोबाइल एकेडमिक स्कूल' व 'मोबाइल पॉलिटिकल स्कूल' जैसी शैक्षणिक तथा राजनीतिक प्रशिक्षण टीमों से जुड़ी रहीं। गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और शारीरिक अक्षमता के बावजूद वह लगातार माओवादी विचारधारा के प्रति समर्पित रहकर काम करती रहीं।

तेलंगाना सरकार की 'आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति' के तहत उन्हें 5 लाख रुपये के इनाम का चेक और 25,000 रुपये की अंतरिम सहायता राशि सौंपी गई। इसके अतिरिक्त, उन्हें पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाले अन्य सरकारी लाभ भी प्रदान किए जाएंगे।

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