रायपुर , अप्रैल 30 -- छत्तरीसगढ़ सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रहण सत्र 2026 की शुरुआत से ठीक पहले संभावित अवरोध को रोकने के लिए कड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है।

सरकार ने यह कदम बीजापुर वनमंडल सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रस्तावित हड़ताल की चेतावनी के मद्देनज़र उठाया गया है।

जानकारी के अनुसार तेंदूपत्ता तोड़ाई कार्य एक मई से प्रारंभ होना है। इससे पहले कर्मचारियों और प्रबंधकीय वर्ग द्वारा विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन की रूपरेखा बनाई जा रही थी, जिससे संग्रहण कार्य प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन ने 29 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर इस सेवा को अत्यावश्यक घोषित कर दिया।

सरकारी आदेश के तहत तेंदूपत्ता कार्य से जुड़े सभी कर्मचारी एवं प्रबंधक अब अनिवार्य सेवाओं के दायरे में आएंगे। किसी भी प्रकार से कार्य से इंकार करने या बाधा उत्पन्न करने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यह प्रावधान अधिसूचना के प्रकाशन से आगामी तीन माह तक प्रभावी रहेगा।

राज्य सरकार का मानना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण गतिविधि प्रदेश की लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे बड़ी संख्या में वनाश्रित परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में इस प्रक्रिया को निर्बाध बनाए रखना आवश्यक है। यह निर्णय न केवल संग्रहण कार्य को समयबद्ध रूप से संचालित करने में सहायक होगा, बल्कि इससे जुड़े हितग्राहियों के आर्थिक हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

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