रायपुर , सितंबर 25 -- छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता कारोबार से जैव विविधता बोर्ड को अब हर साल औसतन करीब 10 करोड़ रुपए मिलने का रास्ता साफ हो गया है। तेंदूपत्ता फॉरेस्ट लॉट की खरीद कीमत पर दो प्रतिशत लाभ-साझेदारी (एबीएस) वसूले जाने के खिलाफ कारोबारियों की याचिकाएं उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी हैं।

आज विभाग से मिली जानकारी के अनुसार न्यायालय के फैसले के बाद विवाद के कारण राज्य लघु वनोपज संघ के पास जमा करीब 30 करोड़ रुपए भी जैव विविधता बोर्ड को हस्तांतरित किए जा सकेंगे। यह राशि तेंदूपत्ता सहित अन्य वनोपज के दोहन वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की बेहतरी तथा सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों में उपयोग की जाएगी।

दरअसल, तेंदूपत्ता कारोबार से दो प्रतिशत एबीएस की राशि पहले से वसूली जा रही थी, लेकिन कारोबारियों ने इस व्यवस्था को न्यायालय में चुनौती दी थी। विवाद लंबित रहने के कारण वसूली गई राशि तेंदूपत्ता संघ के पास जमा थी। करीब 30 करोड़ रुपए जमा होने की जानकारी है।

कारोबारियों की ओर से दलील दी गई थी कि वे वनवासियों अथवा आदिवासी संग्राहकों से सीधे तेंदूपत्ता नहीं खरीदते, बल्कि राज्य लघु वनोपज संघ की सरकारी नीलामी के माध्यम से फॉरेस्ट लॉट खरीदते हैं। इस आधार पर उनका कहना था कि उन पर जैव विविधता कानून के तहत एबीएस लागू नहीं होना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि 1964 का तेंदूपत्ता व्यापार कानून खरीद और व्यापार को नियंत्रित करता है, जबकि जैव विविधता अधिनियम जैव संसाधनों के संरक्षण और उनके व्यावसायिक इस्तेमाल से होने वाले लाभ के न्यायसंगत बंटवारे की व्यवस्था करता है। दोनों कानून अलग लेकिन पूरक हैं। सरकारी नीलामी के माध्यम से तेंदूपत्ता खरीदे जाने से उसके व्यावसायिक उपयोग पर एबीएस की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।

उच्च न्यायालय ने 13 अगस्त 2026 को इससे संबंधित सभी याचिकाएं खारिज करते हुए दो प्रतिशत एबीएस की वसूली को वैध माना। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया टैक्स अथवा बाद में लगाया गया वित्तीय बोझ नहीं है, बल्कि जैव विविधता कानून के तहत पहले से मौजूद लाभ-साझेदारी व्यवस्था का क्रियान्वयन है।

फैसले के बाद संघ के पास जमा करीब 30 करोड़ रुपए जैव विविधता बोर्ड को हस्तांतरित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही भविष्य में तेंदूपत्ता कारोबार से हर साल औसतन करीब 10 करोड़ रुपए बोर्ड को मिलने का अनुमान है।

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