बड़वानी , जून 12 -- मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के गोलाटा गांव से रेस्क्यू किए गए लगभग दो माह के मादा तेंदुआ शावक को उसकी मां से मिलाने के प्रयास फिलहाल रोक दिए गए हैं। वन विभाग और वन्यजीव चिकित्सकों ने शावक में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) संक्रमण के लक्षण दिखाई देने के बाद यह निर्णय लिया है।
वनमंडलाधिकारी आशीष बंसोड़ ने बताया कि आठ जून को अत्यंत कमजोर अवस्था में मिले शावक को उसकी मां से मिलाने के लिए लगातार तीन रात तक रेस्क्यू स्थल पर रखा गया। इस दौरान क्षेत्र की निगरानी नाइट विजन कैमरों से की गई तथा थर्मल ड्रोन की सहायता से भी तलाश अभियान चलाया गया, लेकिन मादा तेंदुआ अथवा उसके अन्य शावकों का कोई पता नहीं चल सका।
उन्होंने बताया कि आसपास के ग्रामीणों से भी जानकारी जुटाई गई, लेकिन हाल के दिनों में किसी ने मादा तेंदुआ, उसके शावकों अथवा किसी मवेशी के शिकार की सूचना नहीं दी। इससे आशंका है कि मादा तेंदुआ अपने अन्य शावकों के साथ क्षेत्र से काफी दूर चली गई है।
इस बीच शावक की स्वास्थ्य स्थिति ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। वन्यजीव विशेषज्ञ एवं पशु चिकित्सक डॉ. महेंद्र बघेल ने बताया कि मंगलवार और बुधवार की रात शावक को कई बार दौरे पड़े। उसके व्यवहार और स्वास्थ्य में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस संक्रमण से मेल खाते लक्षण दिखाई दिए हैं।
उन्होंने बताया कि संक्रमण की पुष्टि के लिए शावक के रक्त नमूने परीक्षण हेतु नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय की वन्यजीव फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने तक स्थापित पशु चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार जारी रखा गया है। शावक को अंतःशिरा द्रव, मल्टीविटामिन तथा द्वितीयक संक्रमण की रोकथाम के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं।
डॉ. बघेल ने बताया कि गुरुवार को दिनभर शावक की स्थिति स्थिर रही। उन्होंने कहा कि लगभग आठ वर्ष पूर्व बावनगजा क्षेत्र से मिले एक नर तेंदुआ शावक में भी इसी प्रकार के लक्षण पाए गए थे। बाद में उसमें सीडीवी संक्रमण की पुष्टि हुई थी, लेकिन उपचार के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया था।
वन विभाग के अनुसार संक्रमण की आशंका के चलते फिलहाल शावक को किसी चिड़ियाघर अथवा बड़े वन्यजीव उपचार केंद्र में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे अन्य वन्यजीवों में संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। अब उसकी आगे की देखभाल और प्रबंधन को लेकर अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद लिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि गोलाटा गांव के एक खेत में यह मादा तेंदुआ शावक अत्यंत कमजोर अवस्था में मिला था। वन विभाग द्वारा उपचार के साथ उसे प्रतिदिन रेस्क्यू स्थल पर ले जाकर उसकी मां से मिलाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन तीन रात तक इंतजार और व्यापक खोजबीन के बावजूद सफलता नहीं मिलने पर यह अभियान फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
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