कोलकाता , जून 03 -- पश्चिम बंगाल में सुश्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को बुधवार को उस समय एक और झटका लगा जब विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ बोस ने पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बंदोपाध्याय के नेतृत्व वाले 58 विधायकों वाले समूह को मुख्य विपक्षी दल की मान्यता दे दी।

विधानसभा ने श्री बंदोपाध्याय को विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी है। मई में हुए विधान सभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। राज्य की 294 सीटों वाली विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस को मात्र 80 सीटें मिली थीं। पराजय के बाद पार्टी में बिखराव की स्थिति उत्पन्न होने लगी थी।

श्री बंदोपाध्याय के नेतृत्व में आज ही तृणमूल के अधिकतर विधायकों के समूह ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर दावा किया था कि वे ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं। श्री बंदोपाध्याय, श्री संदीपन साहा और सुश्री ममता बनर्जी से नाराज विधायकों ने स्पीकर को 58 विधायकों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र सौंपा और सदन में पार्टी की नयी टीम का प्रस्ताव दिया। विधायकों के इस समूह ने श्री बंदोपाध्याय को तृणमूल विधायक दल का नेता, सर्वश्री जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को उप-नेता तथा श्री अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक चुना है।

विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात से पहले श्री बंदोपाध्याय और उनके साथी विधायकों ने विधानसभा परिसर में एक बैठक की। इस बैठक में शामिल कोई भी विधायक गत मंगलवार को मध्य कोलकाता में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के धरने में शामिल नहीं हुए थे। सुश्री बनर्जी के करीबी माने जाने वाले सदस्य शोभनदेव चट्टोपाध्याय, नयना बंद्योपाध्याय, मदन मित्रा और कुणाल घोष जैसे वरिष्ठ नेता बंदोपाध्याय गुट की आज की बैठक से दूर रहे।

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