कोलकाता , जून 03 -- तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी राष्ट्रीय राजधानी में आठ जून को होने वाली विपक्षी इंडी गठबंधन की बैठक में शामिल होंगे।
यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को चुनाव में मिली हार के बाद हो रही है, और ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी को अंदरूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
सुश्री बनर्जी ने चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद से बार-बार यह बात दोहराई है कि विपक्ष फिर से एकजुट होगा और 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए एक नई राजनीतिक लड़ाई शुरू करेगा, जिसमें इंडी गठबंधन इस प्रयास के लिए एक मंच का काम करेगा। विपक्षी बैठक की तारीख को लेकर कई दिनों तक अनिश्चितता बनी हुई थी।
पहले यह बैठक दो जून को प्रस्तावित थी लेकिन कई नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बताया कि वे उस दिन बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। आपसी विचार-विमर्श के बाद, इस बैठक के लिए आठ जून की तारीख तय की गई।
यह बैठक समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कोलकाता दौरे और सुश्री बनर्जी से उनके कालीघाट स्थित आवास पर मुलाकात के ठीक बाद हो रही है। इस मुलाकात के दौरान अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे। इसे चुनावों के बाद विपक्षी एकता को मजबूत करने के प्रयासों के संकेत के तौर पर देखा गया।
गत 30 मई को सोनारपुर में श्री अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले के बाद इंडी गठबंधन भीतर बेहतर तालमेल के संकेत भी दिखाई दिये।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यकमल्लिकार्जुन खड़गे, श्री अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए अभिषेक बनर्जी के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की।
बाद में श्री बनर्जी ने इन नेताओं के संदेशों को पुन:-पोस्ट करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। इससे यह धारणा और मजबूत हुई कि तृणमूल नेतृत्व राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा-विरोधी दलों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए उत्सुक है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इस बैठक से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर हो रहे घटनाक्रम पर पैनी नज़र रखे हुए हैं। पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह और संभावित दलबदल की आशंकाओं को देखते हुए सुश्री बनर्जी और श्री अभिषेक बनर्जी के दिल्ली रवाना होने से पहले पार्टी के विधायी दल की संरचना और समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
इस बात पर भी नजर रहेगी कि राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस नेतृत्व के बीच बढ़ती सक्रियता क्या पश्चिम बंगाल में किसी नए राजनीतिक समीकरण का मार्ग प्रशस्त करती है। राज्य कांग्रेस नेतृत्व ने अब तक श्री बनर्जी पर कथित हमले और तृणमूल कांग्रेस विधायक दल के भीतर उभरते मतभेदों के मुद्दे पर कोई विशेष सहानुभूति नहीं दिखाई है।
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