कोलकाता , जून 13 -- तृणमूल कांग्रेस के अंदर बढ़ती फूट को लेकर अटकलें शनिवार को तब और तेज़ हो गईं, जब पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने नयी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव से मुलाकात की।

इस दौरान बागी तृणमूल कांग्रेस सांसद शताब्दी रॉय भी मौजूद थीं।

श्री बंदोपाध्याय दिन में कोलकाता से दिल्ली पहुंचे और बाद में सुश्री रॉय के साथ श्री यादव के आवास पर गए।

तृणमूल कांग्रेस के ज़्यादातर सांसदों ने सुश्री ममता बनर्जी और श्री अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा न जताते हुए संसद में एक अलग गुट बनाने का फ़ैसला किया है।

बागी गुट के सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेताओं के साथ बातचीत के बाद यह तय हुआ है कि वे लोकसभा में एक स्वतंत्र गुट के तौर पर काम करेंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को समर्थन देंगे। इस प्रस्तावित गुट की अगुवाई काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं, जिन्हें चीफ़ व्हिप बनाया गया है।

इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों का दावा है कि 19 सांसदों ने अलग गुट बनाने के समर्थन में एक पत्र पर पहले ही हस्ताक्षर कर दिए हैं।

श्री बंद्योपाध्याय के हालिया कदम से यह अटकलें तेज हो गई हैं कि वह भी बागी गुट में शामिल हो सकते हैं। बागी गुट से जुड़े नेताओं का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के 28 लोकसभा सांसदों में से बहुत कम ही सुश्री बनर्जी के साथ बने रहेंगे। उनका कहना है कि अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद को छोड़कर बाकी ज्यादातर सांसदों के बागी गुट का समर्थन करने की उम्मीद है।

तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक संकट सबसे पहले इसी हफ्ते सामने आया। पश्चिम बंगाल विधानसभा में शुरू हुई फूट जल्द ही संसद तक फैल गई।सांसदों से पहले तृणमूल कांग्रेस के विधायकों के एक बड़े हिस्से ने विद्रोह किया था। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर पार्टी नेतृत्व की पसंद को नहीं माना और पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोवनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय निकाले गए विधायक रिताब्रत बंद्योपाध्याय का खुलकर समर्थन किया।

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