सिलीगुड़ी , मार्च 31 -- पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ राजनीतिक गतिविधि तथा विरोध-प्रदर्शनों ने जोर पकड़ लिया है और इसी क्रम में मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस ने अपने कानूनी विशेषज्ञों के पैनल के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन किया।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी सोमवार को इसी तरह का विरोध-प्रदर्शन किया था।

यह आंदोलन हालांकि अब केवल राजनीतिक मंचों तक ही सीमित नहीं रह गया है। सोमवार से इस क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोग सड़कों पर उतर आए हैं। उनका आरोप है कि असली मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटा दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया और तत्काल सुधार की मांग की। उनका दावा है कि कई वैध मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया गया है।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विरोध स्थलों पर उनकी शिकायतों को अनसुना कर दिया गया।

अलीपुरद्वार के बीरपारा, सिलीगुड़ी उप-मंडल के फांसीदेवा और मालदा के मोथाबाड़ी से विरोध-प्रदर्शनों की रिपोर्टें हैं। फांसीदेवा और मोथाबाड़ी में प्रभावित लोगों में एक बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय से संबंधित है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों को उनके मताधिकार से असमान रूप से वंचित किया गया है।

सिलीगुड़ी में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार एवं मेयर गौतम देब अपने चुनाव प्रचार के दौरान धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए।

श्री देब ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी से जुड़े कानूनी विशेषज्ञ प्रभावित मतदाताओं की मदद करेंगे।

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