अंकारा , जुलाई 07 -- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को तुर्की को एफ-35 फाइटर जेट कार्यक्रम में वापस शामिल करने और तुर्की वायु सेना को ये विमान बेचने की इच्छा का संकेत दिया है, जिसकी इजरायल और अमेरिकी कांग्रेस (संसद) ने तीखी आलोचना की है।

अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान टर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान के साथ बात करते हुए श्री ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह तुर्की को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करने के विचार से सहमत हैं।

अमेरिकी सरकार के भीतर और इजरायल जैसे प्रमुख सहयोगियों के लंबे समय से चले आ रहे विरोध के बावजूद श्री ट्रंप ने यह रुख अपनाया है।

एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित बिक्री के बारे में पूछे जाने पर श्री ट्रंप ने कहा, "यहां बैठे लोगों सहित बहुत से लोग सोचते हैं कि 'हम ऐसा क्यों नहीं करेंगे'। तुर्की कई मायनों में उन अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक वफादार रहा है, जिन्हें हम वफादार समझते थे। इसलिए यह कुछ ऐसा है, जिस पर हम निश्चित रूप से विचार करेंगे।"श्री ट्रंप ने तुर्की को प्रमुख सहयोगी बताया और कहा कि वह ईरान युद्ध में शामिल हो सकता था, शायद ईरान की तरफ से, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। श्री ट्रंप ने यह दावा भी किया कि युद्ध के दौरान ईरान ने कई मिसाइलें दागीं, जो सीधे तुर्की के इलाके में गिरी थीं।

श्री एर्दोगान ने कहा कि अतीत में उनके देश से एफ-35 विमानों का वादा किया गया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि श्री ट्रंप के साथ इस शिखर बैठक के दौरान यह मुद्दा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगा।

रूस निर्मित एस-400 ट्रिम्फ वायु रक्षा प्रणाली खरीदने के बाद तुर्की को 2019 में एफ-35 कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया था। उस समय अमेरिकी अधिकारियों ने तर्क दिया था कि इस स्टील्थ फाइटर जेट के साथ एस-400 का संचालन करने से संवेदनशील सैन्य तकनीक से समझौता हो सकता है।

पिछले हफ्ते उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की थी कि पेंटागन इस बिक्री के लिए संभावित कानूनी रास्तों की समीक्षा कर रहा है, भले ही रूस की वह प्रणाली अब भी तुर्की के पास ही है।

श्री वेंस ने पत्रकारों से कहा, "अमेरिकी कानून का पालन करने के लिए हमें कुछ चीजों को प्रमाणित करना होगा कि वे पूरी हो चुकी हैं। राष्ट्रपति ने हमसे ऐसा करने के लिए कहा है।"अंकारा के दोबारा एफ-35 कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना इजरायल के लिए विशेष रूप से चिंता का विषय बनी हुई है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले हफ्ते श्री ट्रंप से इस बिक्री को मंजूरी न देने का आग्रह किया था। उन्होंने इसके पीछे इजरायल के प्रति एर्दोगान के बेहद आक्रामक बयानों और इस कदम से क्षेत्र के सैन्य संतुलन के बिगड़ने की आशंका का हवाला दिया था।

इजरायल फिलहाल पश्चिम एशिया का एकमात्र देश है, जो लॉकहीड मार्टिन के एफ-35 लाइटनिंग 2 विमानों का संचालन करता है। अगर इस बिक्री को हरी झंडी मिल जाती है, तो टर्की इस क्षेत्र में इसका संचालन करने वाला दूसरा देश बन जायेगा। साथ ही, वह इस विमान के विकास और उत्पादन के ढांचे में दोबारा शामिल होने वाला पहला पश्चिम एशियाई देश होगा। इस पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को बेचने का अमेरिकी कांग्रेस में भी भारी विरोध हुआ है। प्रतिनिधि डीना टाइटस के नेतृत्व में 18 सांसदों के द्विदलीय समूह ने मंगलवार को संसदीय नेताओं को एक पत्र भेजा, जिसमें उनसे अपील की गयी है कि जब तक टर्की एस-400 प्रणाली को तैनात रखता है, तब तक एफ-35 के किसी भी हस्तांतरण को रोका जाये।

सांसदों का तर्क था कि मौजूदा परिस्थितियों में इस बिक्री को मंजूरी देना अमेरिका के मौजूदा प्रतिबंध कानूनों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी पाबंदियों का उल्लंघन होगा।

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