इटावा , अगस्त 16 -- उत्तर प्रदेशके इटावा में कभी बड़े कारोबारी रहे बुजुर्ग राजकुमार सक्सेना की मौत के बाद तीन बेटों,बेटी ओर पत्नी ने ऐसा मुंह मोड़ा कि पांचों में से कोई बुर्जुग का अंतिम संस्कार को तैयार नहीं हुआ जिसके बाद अनजान शवों का अंतिम संस्कार करने वाली संस्था ने हिन्दू रीत रिवाज से अंतिम संस्कार करना मुनासिब समझा।
सत्तर साल के बुजर्ग राजकुमार सक्सैना की पहचान के बाबजूद अनजान की शक्ल में अंतिम संस्कार किया गया है राजकुमार सक्सेना बड़े करोड़ पति कारोबारी हुआ करते थे लेकिन वक्त की मार ने आज राजकुमार के हालत ऐसे बना दिए कि राजकुमार के शव का अंतिम संस्कार करने को कोई तैयार नहीं हुआ।
पिता पुत्र, पति पत्नी, पिता बेटी के रिश्तों की डोर को झकझोर देने वाली मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी हुई यह दर्दनाक कहानी उत्तर प्रदेश के इटावा से जुड़ी हुई है।
बुजुर्ग शख्स का अंतिम संस्कार इटावा में यमुना नदी के किनारे स्थित श्मशान घाट पर रक्तदाता समूह और पुलिस की देखरेख में किया गया है।
बुजुर्ग की पहचान होने के बाद भी ना तो तीनों बेटों,बेटी ओर पत्नी ने शव को स्वीकार किया और ना ही अंतिम संस्कार में शामिल होना सिर्फ समझा जिसको लेकर के अब हर कोई हैरत में पड़ा हुआ है।
रक्तदाता समूह के संस्थापक शरद तिवारी बताते हैं कि राजकुमार सक्सेना का अंतिम संस्कार करने से मन बड़ा द्रवित हो रहा है क्योंकि जिनमें तीन बेटे बेटी पत्नी हो और कई दफा बुलाने के बावजूद भी यह लोग अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए नहीं आए, सिर्फ इतना ही नहीं राजकुमार सक्सेना की मौत के बाद जब बेटे बेटी और पत्नी को टेलीफोन किए गए तो उन्होंने इतना तो स्वीकार किया कि यह उनके पिता है लेकिन जब बात रिश्तो को निभाने के आई तो मुंह मोड़ लिया।
रक्तदाता समूह के सदस्य आदित्य शाक्य का कहना है कि उनकी अपनी जिंदगी में यह ऐसा पहला मामला है जिसमें पूरा परिवार होने के बावजूद परिवार के लोग किसी बुजुर्ग के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आगे नहीं आए हैं।
सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के पुलिस चौकी प्रभारी राजीव कुमार बताते है कि राजीव सक्सेना जब सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में लावारिस हालत में भर्ती थे तो तमाम दस्तावेजों के माध्यम से उनके बेटों बेटी और पत्नी तक संपर्क स्थापित करने की कोशिश की गई लेकिन पूरे परिवार ने पुलिस की दलील को कोई तवज्जो नहीं दिया ।
अधिकाधिक लोगों का ऐसा मानना है कि उनकी समझ में यह पहला मामला है जिसमें किसी परिवार ने अपने परिवार के मुखिया को अनाथ की शक्ल में छोड़ दिया है।
इटावा जिले में सैफई मैडिकल युनिवर्सिटी में 70 साल के राजकुमार सक्सेना की मौत के बाद जो हुआ, वह रिश्तों की संवेदना पर सवाल खड़ा करता है।
एटा के मारहरा निवासी राजकुमार ने अस्पताल में इलाज के दौरान 12 अगस्त को दम तोड़ दिया, लेकिन उनकी मौत के बाद शव लेने के लिए अब तक कोई अपना नहीं पहुंचा।
पुलिस ने शव को 72 घंटे के लिए शवगृह में रखवाया है। 15 अगस्त को यह अवधि पूरी होने के बाद शाम पांच बजे के अंतिम संस्कार कर दिया गया। जिस पिता ने कभी परिवार के साथ जीवन बिताया, उनकी आखिरी विदाई के समय भी उनके पास अपना कोई नहीं आया ।
राजकुमार करीब दो साल से एटा के एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे। सोलह जुलाई को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ती गई और 12 अगस्त को उनकी मौत हो गई। मौत के बाद जब अस्पताल में कोई रिश्तेदार नहीं मिला तो इसकी जानकारी रक्तदाता समूह के पदाधिकारियों को दी गई।
इसके बाद समूह के संस्थापक शरद तिवारी और उनके साथियों ने राजकुमार के परिवार को खोजने की कोशिश शुरू की। उनके पास मिले दस्तावेजों से बेटे कुबेर सक्सेना का नाम और गाजियाबाद का पता मिला। मोबाइल से संपर्क किया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बातचीत के दौरान बेटे ने राजकुमार को पहचानने से इनकार किया और बाद में फोन भी नहीं उठाया। अस्पताल के काउंसलर डॉ. मनोज मौर्य ने भी फोन पर बेटे से बात कर उन्हें पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
वृद्ध की पत्नी के अलावा उनके तीन बेटे और एक बेटी भी हैं। परिवार की तलाश में जुटे लोगों को राजकुमार के भतीजे पंकज सक्सेना से भी संपर्क हुआ।
उन्होंने बताया कि राजकुमार के तीन बेटे कुबेर, भारत और धादू गाजियाबाद में रहते हैं। उनकी एक बेटी भी है और पत्नी भी जीवित हैं। रक्तदाता समूह के सदस्य जब दस्तावेजों में दर्ज गाजियाबाद के नंदग्राम, दीनदयालपुर स्थित पते पर पहुंचे तो घर पर ताला लगा मिला।
पड़ोसियों ने बताया कि मकान कुबेर सक्सेना का है। पुलिस ने भी संपर्क की कोशिश की, लेकिन कुबेर वहां नहीं मिले। बेटों की ओर से इस मामले में अब तक कोई प्रत्यक्ष बयान सामने नहीं आया है। उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी तरफ से पिता का शव लेने या अंतिम संस्कार में शामिल होने की सहमति नहीं मिली।
राजकुमार के पारिवारिक जीवन को लेकर भी अलग-अलग बातें सामने आई हैं। भतीजे पंकज के अनुसार, राजकुमार के पिता एटा की अदालत में मुंशी थे और परिवार के पास जमीन भी थी। उनके परिवार में पैसों को लेकर विवाद रहने की बात भी सामने आई है। हालांकि ये पारिवारिक दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सवाल यह भी है कि एक पिता की जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर उसके अपने रिश्ते आखिर इतने दूर कैसे हो गए।
स्वतंत्रता दिवस के दिन शाम पांच बजे इटावा के यमुना घाट पर बुजुर्ग राजकुमार सक्सेना का अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज से कर दिया गया है।
सैफई मैडिकल यूनिवर्सिटी के पुलिस चौकी प्रभारी राजीव कुमार पुलिस टीम के साथ मौजूद रहे।
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