चेन्नई , जून 23 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने मंगलवार को उन लोगों को करारा जवाब दिया जो कह रहे थे कि उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को सिर्फ फिल्मों की वजह से मिली लोकप्रियता के कारण जीत मिली है।

श्री विजय ने साफ किया कि वह सीधे फिल्म सेट से उठकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठे हैं। यहां तक पहुंचने के पीछे उनका वर्षों का जमीनी काम और जनता से गहरा नाता है।

तमिलनाडु विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा का जवाब देते हुए श्री विजय ने कहा, "कुछ लोग लगातार यह दावा कर रहे हैं कि मैं सीधे फिल्मों के सेट से उछलकर मुख्यमंत्री बन गया हूं। उन्हीं की भाषा में मेरा जवाब है कि यह सिर्फ रील है, रियल नहीं है।"टीवीके की जीत को एक आकस्मिक घटना और बदलाव के लिए समाज में हुआ मंथन न मानने के इशारों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "उन कई लोगों के विपरीत जो पहले राजनीतिक दल बनाते हैं और फिर जनता के बीच जाते हैं, हम पार्टी शुरू करने से पहले ही लोगों (विजय मक्कल इयक्कम) के पास गये थे।"उनकी नजर में, जो लोग अपनी हार स्वीकार नहीं पा रहे हैं, वे हकीकत मानने को तैयार नहीं हैं, बल्कि टीवीके को सत्ता में चुनने के लिए जनता में ही नुक्स निकाल रहे हैं। द्रमुक का सीधा नाम लिये बिना श्री विजय ने कहा, "उन्होंने ऐसा तब भी किया था, जब एमजीआर (फिल्मी हस्ती और अन्नाद्रमुक के संस्थापक एमजी रामचंद्रन) भारी बहुमत से सत्ता में आये थे। वे अब भी यही कर रहे हैं। पिछले 50 से अधिक वर्षों से वे यही करते आ रहे हैं। कारणों को समझने की कोशिश कीजिए और कृपया अपनी रणनीति तथा पैंतरे बदलिए।"उनका कड़ा पलटवार था, "अब यह कोई पारिवारिक वंश या राजशाही नहीं, बल्कि आम जनता का शासन है।"द्रमुक का दावा था कि उसके पुराने सहयोगियों ने टीवीके सरकार को समर्थन देने के लिए उससे इजाजत ली है। श्री विजय ने इस बात को गलत बताते हुए कहा कि दोनों वामपंथी दलों ने साफ कर दिया है कि वे अपने फैसले खुद लेते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसलिए यह कहना बिल्कुल गलत और बेबुनियाद है कि यह सरकार उनकी मेहरबानी से चल रही है।

श्री विजय ने याद दिलाया कि पार्टी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसका विरोध किया था और तमिलनाडु के मछुआरों के खिलाफ श्रीलंकाई नौसेना की कार्रवाइयों पर भी कड़ा रुख अपनाया था।

उन्होंने पिछले वर्ष सितंबर में अपनी रैली के दौरान करूर में हुई दर्दनाक भगदड़ को साजिश बताया, जिसमें 41 लोगों की जान चली गयी थी और सवाल किया, "इसका ठीकरा हमारे सिर पर फोड़ दिया गया। क्या राजनीति इसी तरह की जानी चाहिए?"जब मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के सांकेतिक नाम 'पार्टी फंड' जैसी लीकेज का जिक्र किया, जिसे पिछले शासक (द्रमुक शासन) सरकारी टीएएसएमएसी दुकानों से वसूलते थे और कहा कि इन्हें बंद कर राजस्व को राज्य के खजाने में वापस लाया जा रहा है तो द्रमुक सदस्य विरोध जता कर सदन से वॉकआउट कर गये।

उन्होंने उदयनिधि पर तंज कसते हुए कहा, "विपक्ष के नेता केवल अपना वजूद दिखाने के लिए सरकार का विरोध कर रहे हैं, उनकी बातों में कोई दम नहीं है।" इसके बाद, स्पीकर की इजाजत लेकर उन्होंने एक कहानी सुनायी। कहानी एक ऐसे आदमी की थी, जो किसी को ढूंढ़ रहा होता है, तभी एक लड़का उससे पूछता है कि वह क्या ढूंढ़ रहा है। जवाब में वह आदमी कहता है कि तुम्हारे पिता ने कहा था कि वह पास में ही होंगे, लेकिन वे कहीं दिख नहीं रहे हैं। इसके बाद, उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने खास फिल्मी अंदाज में हाथ से इशारा करते हुए अपना भाषण खत्म किया।

अपने एक घंटे से कुछ अधिक लंबे जवाब में श्री विजय ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया और उनका मुकाबला किया। इसमें सदन में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान दो बार राष्ट्रगान गाये जाने को सही ठहराना, कानून-व्यवस्था, बिजली, किसान, केंद्र-राज्य संबंधों पर तमिलनाडु सरकार का रुख और भाजपा के साथ वैचारिक रूप से विरोधी होने के बावजूद राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयास करते हुए केंद्र के साथ टकराव का रुख न अपनाने जैसे विभिन्न मुद्दे शामिल थे।

अपने पूर्ववर्ती एमके स्टालिन की नकल करते हुए, जिन्होंने कभी गठबंधन की बातचीत के दौरान मीडिया के सामने हाथ से झटका देने का इशारा किया था, श्री विजय ने सत्ता पक्ष के सदस्यों की मेज थपथपाहट के बीच वही इशारा दोहराया। उनके प्रशंसक इस पर दीवाने हो रहे हैं और इसे इस तरह ले रहे हैं मानो यह उनकी किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म का दृश्य हो।

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