तिरुपति , फरवरी 08 -- तिरुपति स्थित श्री कपिलेश्वर स्वामी के वार्षिक ब्रह्मोत्सव का शुभारंभ रविवार सुबह पारंपरिक और भव्य तरीके से ध्वजारोहण समारोह के साथ हुआ।

मंदिर के पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और 'हर-हर महादेव' के जयघोष के बीच शैव आगम शास्त्र के अनुसार ध्वजारोहण संपन्न हुआ।

पंचमूर्तियों-श्री सोमास्कंद मूर्ति, श्री कामाक्षी अम्मावारु, श्री विनायक स्वामी, श्री चंडीकेश्वर स्वामी तथा श्री सुब्रमण्य स्वामी (श्री वल्ली और श्री देवसेना सहित) की दिव्य उपस्थिति में प्रातः 6:05 बजे शुभ मकर लग्न में नंदी की छवि वाले पवित्र ध्वज को ध्वजस्तंभ पर फहराया गया।

ध्वजारोहण के पश्चात ध्वजस्तंभ का विशेष अभिषेक, बलि, नैवेद्य, दीपाराधना और अन्य पारंपरिक उपाचार संपन्न किए गए। मंदिर परंपरा के अनुसार ध्वजस्तंभ का विशेष अभिषेक वर्ष में केवल एक बार, ब्रह्मोत्सव के ध्वजारोहण दिवस पर ही किया जाता है।कार्यक्रम के दौरान ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के मंत्रों का भी उच्चारण किया गया। संपूर्ण अनुष्ठान कंकणभट्टार श्री उदय स्वामी गुरुकुल के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।

बाद में श्री सोमास्कंद मूर्ति (भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान सुब्रमण्य स्वामी) तथा श्री कामाक्षी अम्मावारु का पालकी उत्सव निकाला गया। देवताओं की भव्य शोभायात्रा तिरुपति की सड़कों से होकर निकली, जहां भक्तों ने श्रद्धापूर्वक दर्शन किए।

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