दरभंगा , मई 07 -- बिहार में दरभंगा शहर के तालाबों एवं वेटलैंड्स के संरक्षण की मांग को लेकर गुरुवार को "तालाब बचाओ अभियान" के तहत पदयात्रा निकाली गई।

पदयात्रा की शुरुआत शहर के ऐतिहासिक गंगासागर तालाब से हुई, जिसे पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मंजू झा, रामनारायण झा, उमेश राय, रवि के पटवस, धीरेंद्र कुमार झा, डा. विद्यानाथ झा, नारायण मंडल ने संयुक्त रूप से झंडी दिखाकर रवाना किया। पदयात्रा में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और महिलाओं ने भाग लिया। प्रतिभागी हाथों में झंडा, बैनर और तख्तियां लेकर गंगासागर, दिग्घी, हराही सहित जिले के अन्य तालाबों और वेटलैंड्स की सुरक्षा एवं संरक्षण की मांग करते हुए नारे लगा रहे थे। पदयात्रा गंगासागर से निकलकर दोनार, अल्लपट्टी और बेंता होते हुए समाहरणालय स्थित धरनास्थल पहुंची, जहां सभा आयोजित की गई।

सभा को छात्र नेता दिलीप कुमार, वामपंथी नेता धीरेंद्र कुमार झा, बैद्यनाथ यादव, आरके दत्ता, शारदानंद चौधरी, स्वयंसेवी संस्था संघ के अध्यक्ष विजय कुमार पासवान, डा. अशोक कुमार सिंह, अर्चना जायसवाल, जयशंकर गुप्ता, इंदिरा कुमारी एवं किसान नेता योगेंद्र यादव सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि शहर के तालाब और वेटलैंड्स लगातार अतिक्रमण और प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं। इनके संरक्षण के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का संचालन अजीत कुमार मिश्र, डा. अमरजी कुमार, अभिषेक झा, विजय सक्सेना एवं तासीम नवाब ने किया। पदयात्रा में अविनाश भास्कर, प्रकाश बंधु, बैद्यनाथ भगत, मनोहर झा, माधव मंडल, दिलीप मंडल, राजकुमार जी, संजय श्रीवास्तव, जितेंद्र श्रीवास्तव, महेश यादव, गोपाल पासवान, कुमार शुभम, अनीश कुमार, सुमन कुमार, प्रिंस कुमार, छोटे कुमार, आशुतोष कुमार, बिनोद यादव, श्रेया कुमारी, पल्लवी कुमारी, शोभा शुक्ला, अंकित चौधरी एवं धनंजय कुमार सहित सैकड़ों लोग शामिल रहे।

कार्यक्रम के अंत में तालाब बचाओ अभियान के संयोजक नारायणजी चौधरी के नेतृत्व में जिलाधिकारी, दरभंगा को ज्ञापन सौंपकर तालाबों और वेटलैंड्स को अतिक्रमण एवं प्रदूषण से मुक्त कराने की मांग की गई।तालाब बचाओ अभियान के संयोजक नारायणजी चौधरी ने बताया कि तालाब बचाओ अभियान 2013 से अपने अन्य मांगों के अलावे इन तीन एतिहासिक झीलों के पारदर्शी सीमांकन करने के लिए लगातार अनुरोध करता रहा है, जो पिछले 13 वर्षों से नहीं हो सका है।बुडको द्वारा अभी जिस तरह से सौन्दर्यीकरण किया जा रहा है, वह वेटलैंड्स रूल्स, 2017 और इन्डिकेटिव गाइडलाइन्स का खुला उलंघन है। साथ ही जल और पर्यावरण से संबंधित कानून का भी पुर्णतः उपेक्षा है। इसीलिए बुडको का सौन्दर्यीकरण सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायलय पटना के आदेश का भी उलंघन है। इस संबंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के ओ.ए. 155/2022 तारीख 23 मार्च 2023 को पारित आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है।

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