पुणे , अक्टूबर 25 -- जाने-माने शायर और गीतकार जावेद अख्तर ने कहा है कि समाज तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन हमारी सांस्कृतिक जड़ें गहराई में नहीं जा पा रही हैं और यह एक खतरा है।
पुणे के विमान नगर स्थित सिम्बायोसिज़ इशान्य भवन में 24 और 25 अक्टूबर को आयोजित सातवें 'सिम्बायोसिज़ लिटरेरी फेस्टिवल' के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए पूर्व सांसद अख्तर ने कहा, "हमारा समाज तेजी से प्रगति कर रहा है, लेकिन हमारी सांस्कृतिक जड़ें सिकुड़ रही हैं। हम एक ऐसे पेड़ की तरह हैं जो अपनी जड़ों को मजबूत किए बिना लंबा और चौड़ा होता जा रहा है। लेकिन कोई भी पेड़ गहरी जड़ों के बिना खड़ा नहीं रह सकता। हम गहराई की कीमत पर गति प्राप्त कर रहे हैं, जो खतरनाक है।"सिम्बायोसिज़ इंटरनेशनल (डीम्ड यूनिवर्सिटी) द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव का विषय "वेयर स्टोरीज गैदर" था। इसका उद्घाटन श्री अख्तर ने किया। उन्होंने अपने पिता और प्रसिद्ध उर्दू कवि जां निसार अख्तर की संपादित कविता संग्रह 'हिंदोस्तान हमारा' पर एक चर्चा में भी हिस्सा लिया।
उद्घाटन समारोह में सिम्बायोसिज़ के संस्थापक और अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) एस.बी. मजूमदार, सिम्बायोसिज़ इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की कुलाधिपति डॉ. विद्या येरवडेकर और निदेशक डॉ. श्वेता देशपांडे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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