अंबिकापुर , सितंबर 17 -- छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हसदेव अरण्य क्षेत्र के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को सार्वजनिक बहस की चुनौती देते हुए गुरुवार को दावा किया कि उनकी सरकार ने तारा सहित नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था और बाद में केंद्र ने 40 खदानों को डि-नोटिफाई किया था।
अंबिकापुर में आयोजित कांग्रेस के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे बघेल ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि तारा कोल माइंस दिया गया है, जबकि विधानसभा से प्रस्ताव पारित किया गया था कि हसदेव क्षेत्र में और खदानों में खनन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, "भारत सरकार से 9 कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने हमने पत्र लिखा।"बघेल ने कहा कि तत्कालीन केंद्रीय कोयला मंत्री जोशी के छत्तीसगढ़ आने पर उन्होंने उनसे मुलाकात कर हसदेव क्षेत्र में खनन नहीं करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि यह घना जंगल और हसदेव का कैचमेंट एरिया है तथा यहां खनन होने से सिंचाई और थर्मल पावर प्रभावित होने के साथ आदिवासियों का विस्थापन होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने स्वयं 40 खदानों को डि-नोटिफाइड किया था। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिसंबर 2025 में भारत सरकार को किसके स्वार्थ और किस दबाव में पत्र लिखकर तारा कोल ब्लॉक की नीलामी करने को कहा।
हसदेव क्षेत्र की खदानें कांग्रेस शासनकाल में आवंटित किए जाने के भाजपा के आरोपों पर बघेल ने मुख्यमंत्री को बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा, "विष्णुदेव साय बैठ जाएं, पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री डिबेट कर लेते हैं।"इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस हसदेव क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए बड़ा आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी छत्तीसगढ़ आकर इस आंदोलन की शुरुआत करेंगे और उनका बस्तर तथा सरगुजा आने का कार्यक्रम भी होगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित