रायपुर , सितंबर 11 -- छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तारा कोल ब्लॉक को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के आरोपों पर पलटवार करते हुए शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस अपने शासनकाल के फैसलों को छिपाकर प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है।

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) के अध्यक्ष एवं भाजपा नेता सौरभ सिंह ने यहां जारी बयान में कहा कि जिस तारा कोल ब्लॉक और हसदेव-अरण्य क्षेत्र को लेकर कांग्रेस आज सवाल उठा रही है, वहां खनन का रास्ता खोलने और वन स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से जुड़े निर्णय कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के समय ही लिए गए थे।

श्री सिंह ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल के दौरान जून 2021 में तत्कालीन केंद्रीय कोयला मंत्री से तारा कोल ब्लॉक सीएमडीसी को आवंटित करने का आग्रह किया था। उन्होंने सवाल किया कि यदि तारा में खनन पर्यावरण के लिए विनाशकारी था तो बघेल ने मुख्यमंत्री रहते हुए इस ब्लॉक को सीएमडीसी को देने की मांग क्यों की थी।

उन्होंने कहा कि हसदेव-अरण्य क्षेत्र में खनन से जुड़े निर्णय केंद्र की तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल में भी लिए गए थे। उन्होंने दावा किया कि तारा तथा परसा ईस्ट एवं केते बासन (पीईकेबी) परियोजनाओं के संबंध में वन सलाहकार समिति (एफएसी) की अनुशंसा नहीं होने के बावजूद तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश ने परियोजनाओं को मंजूरी देने का निर्णय लिया था। तारा परियोजना को 23 जून 2011 को प्रथम चरण की वन स्वीकृति दिए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।

श्री सिंह ने कहा कि वर्तमान में तारा कोल ब्लॉक में खनन की अनुमति नहीं दी गई है। केंद्र सरकार की वाणिज्यिक कोयला ई-नीलामी में सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड सफल बोलीदाता रही है। वास्तविक खनन शुरू होने से पहले वन एवं पर्यावरण स्वीकृति समेत सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां और निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नीलामी को सीधे खनन और जंगल की कटाई की अनुमति के रूप में प्रस्तुत कर भ्रम पैदा कर रही है।

सीएमडीसी अध्यक्ष ने कांग्रेस की ओर से कथित रूप से 10 लाख से अधिक पेड़ काटे जाने संबंधी दावे को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि मोटे आकलन के अनुसार परियोजना में इस संख्या के दसवें हिस्से के आसपास पेड़ों की कटाई संभावित है और वह भी अलग-अलग चरणों में होगी।

श्री सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में करीब सात करोड़ पौधे लगाने का अभियान चलाया है। उन्होंने इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट-2023 का हवाला देते हुए दावा किया कि छत्तीसगढ़ के वन एवं वृक्ष आवरण में 683.62 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित