रायपुर , सितंबर 20 -- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधते हुए रविवार को आरोप लगाया कि यह फैसला छत्तीसगढ़िया अस्मिता, आदिवासी अधिकारों और राज्य के जल-जंगल-जमीन के हितों के खिलाफ है।

श्री बैज ने यहां एक बयान जारी कर कहा कि तारा कोल ब्लॉक की नीलामी से पहले स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा से संबंधित रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन गतिविधियों से स्थानीय आदिवासी समुदाय के विस्थापन, पर्यावरण और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

उन्होंने कहा कि हसदेव-सरगुजा क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं को मिले अधिकारों का पालन किस प्रकार सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने 23 जून 2023 को तारा सहित राज्य के नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने के लिए केंद्र को पत्र लिखा था। उन्होंने यह भी कहा कि जुलाई 2022 में विधानसभा ने हसदेव-अरण्य क्षेत्र में नए कोल ब्लॉकों के आवंटन और नीलामी के विरोध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था।

श्री बैज ने कहा कि राज्य में सरकार बदलने के बाद 11 दिसंबर 2025 को प्रदेश सरकार ने तारा कोल ब्लॉक को नीलामी में शामिल करने के संबंध में केंद्रीय कोयला मंत्रालय को पत्र लिखा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद ब्लॉक की नीलामी का रास्ता खुला और सरकार ने स्थानीय हितों के बजाय कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी।

गौरतलब है कि केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने हाल में तारा (संशोधित) कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर जारी स्पष्टीकरण में कहा था कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 11 दिसंबर 2025 के पत्र में तारा कोल ब्लॉक को लेमरू हाथी गलियारे से बाहर बताते हुए इसे आगामी नीलामी में शामिल करने को कहा था। इसके बाद ब्लॉक की सीमा में संशोधन कर इसे 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी में रखा गया। मंत्रालय के अनुसार नीलामी में नौ बोलियां मिलीं और ब्लॉक 37.50 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी पर नीलाम हुआ।

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