पुणे , अगस्त 03 -- इस मानसून महाराष्ट्र की सह्याद्री पहाड़ियों में अभूतपूर्व बारिश दर्ज की गयी है। जून और जुलाई के दौरान अकेले ताम्हिणी घाट में 6,000 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई है, जिसने भारत के सबसे नम क्षेत्रों में से एक चेरापूंजी को भी पीछे छोड़ दिया है।

एक जून से 31 जुलाई तक के बारिश के आंकड़ों से पता चलता है कि ताम्हिणी ने सिर्फ दो महीनों में ही 6,000 मिमी के आंकड़े को पार कर लिया, जो इसकी 6,000 से 7,000 मिमी की वार्षिक औसत बारिश के लगभग बराबर है। केवल छह जुलाई से आठ जुलाई के बीच, इस क्षेत्र में 72 घंटों में असाधारण रूप से 1,635 मिमी बारिश हुई, जो इसकी औसत वार्षिक वर्षा का लगभग आधा है। ताम्हिणी में छह जुलाई को 525 मिमी, सात जुलाई को 530 मिमी और आठ जुलाई को 580 मिमी बारिश दर्ज की गई।

महाराष्ट्र के अन्य प्रमुख हिल स्टेशनों पर भी रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई। महाबलेश्वर में जून और जुलाई के दौरान 5,500 मिमी बारिश हुई, जिससे 123 साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया, जबकि लोनावला में इस अवधि के दौरान अब तक की सबसे अधिक 4,800 मिमी बारिश दर्ज की गयी।

पुणे जिले के मुलशी, भिरा, अवांवे, धवडी और लोनावला के घाट क्षेत्रों में भी भारी बारिश दर्ज की गई, जहां तीव्र मानसूनी गतिविधियां आम बात हैं।

मौसम वैज्ञानिकों ने इस असाधारण बारिश का कारण बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने मौसम प्रणालियों को बताया है, जो अल नीनो स्थितियों के बावजूद सक्रिय रहे। जून में अपेक्षाकृत कमजोर मानसून के बाद, जुलाई में बारिश में भारी तेजी आई, जिससे राज्य भर के जलाशयों में पानी का भंडारण काफी बढ़ गया।

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