बैतूल , सितंबर 11 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के मुलताई स्थित मां ताप्ती उद्गम स्थल के संरक्षण और संवर्धन को लेकर गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार ने पहल का आश्वासन दिया है। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में उत्तमराव गायकवाड़ ने युवाओं के प्रेरणास्रोत डॉ. चिन्मय पंड्या से मुलाकात कर गौ संरक्षण और ताप्ती उद्गम स्थल के विकास एवं संरक्षण पर चर्चा की।
श्री गायकवाड़ ने पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के गौ संरक्षण और तीर्थ संरक्षण के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुदेव ने 24 वर्षों तक गाय को जौ-गेहूं खिलाकर उसके गोबर से निकले अन्न की रोटी बनाकर गायत्री माता को भोग लगाया और स्वयं ग्रहण किया। उन्होंने तीर्थों के महत्व और संरक्षण को लेकर 'तीर्थ सेवन क्यों और कैसे' सहित साहित्य की रचना भी की। इसी भावना के तहत गायत्री परिवार की ओर से प्रतिवर्ष गंगा सहित विभिन्न तीर्थों में स्वच्छता अभियान चलाया जाता है।
उन्होंने कहा कि गौ माता को पॉलीथिन खाने के लिए मजबूर होना और मां ताप्ती के उद्गम स्थल पर गंदा पानी पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है। मुलताई में श्रद्धालु जिस पवित्र जल का आचमन करते हैं, उसमें गटर का पानी गिरना तीर्थ की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि गौ माता को सम्मान और मां ताप्ती को उनकी गौरव-गरिमा के अनुरूप स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, चित्रकूट और अमरकंटक की तरह मुलताई स्थित ताप्ती उद्गम का भी विकास और संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए गायत्री परिवार के कार्यकर्ता जनजागृति अभियान चलाकर लोगों को जोड़ेंगे।
डॉ. पंड्या ने ताप्ती संरक्षण में जुटे कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आश्वासन दिया कि निकट भविष्य में मां ताप्ती की गोद में तीन दिवसीय महायज्ञ आयोजित किया जाएगा और वे स्वयं तीनों दिन उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर शांतिकुंज की ओर से डॉ. पंड्या ने उत्तमराव गायकवाड़ को गायत्री माता की तस्वीर भेंट की। श्री गायकवाड़ ने उन्हें मां ताप्ती उद्गम का चित्र भेंट किया।
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