रायकोट/अमृतसर , अगस्त 26 -- श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने बुधवार को कहा कि सत्ता के नशे में सिख पंथ की परंपराओं को चुनौती देने वाली ताकतों को सिख कौम कभी स्वीकार नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि सरकारों को समझना चाहिए कि पंथ की सहमति के बिना सिखों से संबंधित कोई नीति या कानून लागू नहीं किया जा सकता।
ज्ञानी गड़गज्ज बुधवार को मीरी-पीरी खालसा मार्च के दूसरे चरण के तहत गुरुद्वारा टाहलियाणा साहिब, रायकोट से अगले पड़ाव गुरुद्वारा चुले बाबा आला सिंह जी, लोंगोवाल के लिए मार्च की रवानगी के अवसर पर आयोजित धार्मिक दीवान को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी अमरजीत सिंह, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह सहित प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
ज्ञानी गड़गज्ज ने रायकोट की ऐतिहासिक धरती का उल्लेख करते हुए कहा कि दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को यहीं साहिबजादों की शहादत की खबर मिली थी। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास अन्याय और अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में भी सरकारें ताकत के बल पर पंथक परंपराओं को चुनौती देने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने सिख संगत से ऐसी ताकतों से सचेत रहने और सिख परंपराओं से जुड़े रहने की अपील की।
इस मौके पर एडवोकेट धामी ने संगत से अपील की कि बंदी सिंहों की चढ़दी कला और रिहाई के लिए 29 अगस्त को सभी गुरुद्वारा साहिबानों में अरदास की जाये। उन्होंने कहा कि कई बंदी सिंह अपनी कानूनी सजा से भी अधिक समय जेलों में बिता चुके हैं, लेकिन उनकी रिहाई के मुद्दे पर सरकारों का रवैया उचित नहीं रहा है।
इस दौरान तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह ने संगत को गुरमत के अनुसार जीवन जीने तथा बाणी और बाणे से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
मीरी-पीरी खालसा मार्च गुरुद्वारा टाहलियाणा साहिब, रायकोट से रवाना होकर विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए गुरुद्वारा चुले बाबा आला सिंह जी, लोंगोवाल पहुंचेगा, जहां से गुरुवार को यह अगले पड़ाव के लिए रवाना होगा।
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